
लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत के साथ सीमा विवाद में उलझा चीन अपनी सैन्य ताकत को चमकाने में दिन-रात जुटा हुआ है। इसी कड़ी में चीनी सेना ने दावा किया है कि उसने अपने स्वदेशी मीडियम रेंज मिसाइल डिफेंस सिस्टम HQ-16 की ताकत को अपग्रेड करके पहले से चार गुना तक अधिक शक्तिशाली बना दिया है। ड्रैगन इस नए अपग्रेड के जरिए अपनी हवाई सीमाओं को अभेद्य बनाने का ढोंग रच रहा है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो चीनी तकनीक लाख दावों के बाद भी रूसी और भारतीय हथियारों के सामने टिकती नहीं दिख रही है।
चार गुना ताकत बढ़ाने के बाद भी S-400 के सामने 'बच्चा' है चीनी सिस्टम चीन ने भले ही अपनी इस मिसाइल डिफेंस प्रणाली की रेंज, रडार ट्रैकिंग क्षमता और इंटरसेप्टर स्पीड को चार गुना बेहतर करने की बात कही हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसकी तुलना जब रूस के खतरनाक S-400 ट्रायम्फ सिस्टम से की जाती है, तो चीनी सिस्टम कहीं नहीं ठहरता। रूस का S-400 दुनिया का सबसे खतरनाक और सटीक एयर डिफेंस माना जाता है, जो 400 किलोमीटर की दूरी से एक साथ कई दुश्मनों का काल बन सकता है। भारत के पास भी यह रूसी सिस्टम मौजूद है। चीनी HQ-16 की रेंज और रडार तकनीक इस रूसी तकनीक के सामने आज भी किसी बच्चे की तरह बेहद शुरुआती और कमजोर स्तर की नजर आती है।
भारतीय सेना की 'ब्रह्मोस' मिसाइल के सामने कैसे टिकेगा ड्रैगन चीनी सेना के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द और असल चुनौती रूस का S-400 नहीं, बल्कि भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' है। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज और अचूक मिसाइलों में शुमार है, जो अपनी तय मैक स्पीड (ध्वनि की रफ्तार से लगभग तीन गुना तेज) से दुश्मन के इलाके में तबाही मचाती है। चीनी HQ-16 को मुख्य रूप से धीमी गति वाले लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और पारंपरिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। जब बात ब्रह्मोस जैसी हाइपर-मैन्युवरेबल और बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने वाली घातक मिसाइल की आती है, तो चीन के इस अपग्रेड सिस्टम के रडार उसे ट्रैक करने में ही हांफने लगेंगे।
सीमा पर चीन के इस नए पैंतरे से भारत कितना सुरक्षित चीन की ओर से किए जा रहे इस सैन्य आधुनिकीकरण पर भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान की पैनी नजर बनी हुई है। भारत ने पहले ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अपनी स्थिति को बेहद मजबूत कर रखा है। भारत के पास न केवल S-400 जैसा सुरक्षा कवच है, बल्कि स्वदेशी आकाश प्राइम, एमआरएसएएम (MRSAM) और पिनाका रॉकेट सिस्टम जैसे घातक हथियार तैनात हैं। ऐसे में चीन का अपनी पुरानी मिसाइल तकनीक HQ-16 को सुधारना उसकी अपनी घबराहट और मजबूरी को दर्शाता है, क्योंकि भारतीय सेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ही रणनीतियां चीनी सेना के हर मंसूबे को पलक झपकते ही मिट्टी में मिलाने का दम रखती हैं।
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