उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को स्वावलंबी बनाने और प्रदेश में लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान‘ (डल्न्ट।) राज्य के युवाओं के लिए आत्मनिर्भर होने का एक बड़ा आधार बन चुका है। यह योजना उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी उद्यमशील अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक अत्यंत प्रभावी और दूरदर्शी कदम है। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में इसके लिए भारी-भरकम प्रावधान किया, जो राज्य शासन की युवाओं और समाज के हर वर्ग के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रतिवर्ष युवाओं को नए उद्यम स्थापित करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ यह योजना उद्योग और सेवा क्षेत्र में नई सूक्ष्म इकाइयाँ स्थापित करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहली बार व्यवसाय शुरू कर रहे युवाओं को 5 लाख रुपये तक की परियोजनाओं के लिए पूरी तरह से ब्याज मुक्त ऋण यानी शत-प्रतिशत ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे शुरुआती दौर में उन पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े। दो चरणों में विभाजित इस अभियान के प्रथम चरण में ₹5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण 4 वर्ष के लिए मिलता है, जिसमें 6 महीने का मोरेटोरियम (भुगतान की मोहलत) भी शामिल है। वहीं, पहले चरण का सफलतापूर्वक पुनर्भुगतान करने वाले सफल उद्यमियों के लिए द्वितीय चरण में व्यवसाय के विस्तार हेतु ₹10 लाख से लेकर अधिकतम ₹20 लाख तक के ऋण की व्यवस्था की गई है, जिस पर 50ः तक की ब्याज सब्सिडी दी जाती है।
आधुनिकता और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए इसमें डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन भी जोड़ा गया है। पात्रता के मानकों को बेहद व्यावहारिक बनाकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के 21 से 40 वर्ष के न्यूनतम 8वीं पास युवाओं को इससे जोड़ा जा रहा है, जिसमें ‘एक जिला एक उत्पाद‘ (व्क्व्च्), विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और तकनीकी डिप्लोमा धारकों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है ताकि हुनर को सीधे बाजार से जोड़ा जा सके।
यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह राज्य के नागरिकों को ‘रोजगार देने वाले‘ की भूमिका में लाने का एक सशक्त माध्यम है। इसका सबसे जीवंत और प्रेरणादायी उदाहरण उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के ग्राम साम बहनपुर-पाटमपुर निराजन की रहने वाली सुनीता देवी के रूप में देखा जा सकता है। दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुनीता देवी, जो वंदना महिला प्रेरणा (बीबी) और परिवर्तन महिला प्रेरणा (सीएलएफ) से जुड़ी हैं, का एक साधारण गृहणी से लेकर एक आत्मनिर्भर महिला बनने तक का सफर बेहद गौरवशाली है। एक समय था जब वह केवल खेती-बाड़ी के छोटे-मोटे काम कर पाती थीं, जिससे कोई निश्चित आय नहीं होती थी। उनके पति मजदूरी करते थे, लेकिन व्यसनों के कारण घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय और तनावपूर्ण बनी रहती थी। पांच बच्चों का भरण-पोषण, उनके बेहतर भविष्य और दो वक्त के भोजन की व्यवस्था करना भी सुनीता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। निराशा के उस अंधकारमय दौर में भी सुनीता देवी ने हिम्मत नहीं हारी और लगभग तीन वर्ष पूर्व वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, जिसने उनके जीवन को एक नई दिशा दी।
बदलाव की यह बयार तब और तेज हुई जब उन्हें विकास खंड परिसर में आयोजित ई-रिक्शा से संबंधित एक अभिनव कार्यक्रम की जानकारी मिली। शासन के प्रयासों से आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लेकर सुनीता ने जाना कि महिलाएं किस तरह ई-रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका कमा रही हैं और समाज में सिर उठाकर जी रही हैं। इस विचार ने उनके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने ई-रिक्शा प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेकर पूरी लगन से ड्राइविंग सीखी। इसके बाद जब वह जिला स्तर पर आयोजित ‘आर्या मंच‘ कार्यक्रम में पहुंचीं, तो वहां दिखाए गए प्रेरणादायक वीडियो और प्रशासन द्वारा दिए गए मार्गदर्शन व प्रोत्साहन ने उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ कर दिया। प्रशासन की टीम ने हर कदम पर उनका सहयोग किया और सुनीता ने पूरी दृढ़ता के साथ ई-रिक्शा व्यवसाय को ही अपनी आत्मनिर्भरता का जरिया बनाने का संकल्प ले लिया।
इस संकल्प को सिद्धि में बदलने का काम ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान‘ ने किया। इस योजना के अंतर्गत सुनीता देवी को ₹2.25 लाख का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से मात्र ₹22,500 उन्होंने स्वयं निवेश किए और शेष राशि बैंक के माध्यम से ऋण के रूप में प्राप्त हुई। इस वित्तीय सहायता की बदौलत वह अपना स्वयं का ई-रिक्शा खरीदने में सफल रहीं। आज सुनीता देवी प्रतिदिन ₹600 से ₹800 तक की सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। इस नियमित आय से न केवल वह अपने घर का खर्च सुचारू रूप से चला रही हैं, बल्कि बच्चों की अच्छी शिक्षा सुनिश्चित कर रही हैं, बीमा की किस्तें भर रही हैं और बैंक के ऋण का समय पर पुनर्भुगतान भी कर रही हैं। जिस परिवार में कभी आर्थिक तंगी के कारण अशांति रहती थी, वहां आज खुशहाली और स्थिरता आ चुकी है।
सुनीता देवी की यह यात्रा केवल आर्थिक मोर्चे पर सफल होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने की भी एक मिसाल है। शुरुआत में जब उन्होंने ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया, तो समाज के कुछ लोगों ने उनके इस कदम का उपहास उड़ाया और परिवार से भी शुरुआती दौर में वैसा सहयोग नहीं मिला जिसकी उन्हें अपेक्षा थी। लेकिन सुनीता ने समाज की परवाह न करते हुए अपने कदमों को पीछे नहीं खींचा। उनकी निरंतर मेहनत, ईमानदारी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की सफलता ने आज आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं। आज वही समाज जो कभी उन पर हंसता था, उनके काम की सराहना करता है और उन्हें एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करता है।
सुनीता देवी आज राज्य की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज बन चुकी हैं। उनका मानना है कि जब कोई महिला आत्मनिर्भर बनने के लिए सड़क पर निकलती है, तो वह कभी खाली हाथ नहीं लौटती। शासन द्वारा संचालित ये कल्याणकारी योजनाएं वास्तव में समाज के गरीब और वंचित वर्गों के जीवन की तमाम मुश्किलों का अचूक समाधान साबित हो रही हैं। जब एक महिला स्वयं धनार्जन करने लगती है, तो उसके जीवन की समस्याओं का अंत तो होता ही है, साथ ही पूरे परिवार और समाज की उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म इकाइयों की स्थापना से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, जिससे महानगरों की ओर होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लग रही है। शासन की यह दूरदर्शी सोच और सकारात्मक नीतियां उत्तर प्रदेश को न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं और युवाओं की आकांक्षाओं को ऊंची उड़ान देकर आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के भव्य संकल्प को धरातल पर सिद्ध कर रही हैं।
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