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तमिलनाडु में नहीं लगेगा राष्ट्रपति शासन! CJI सूर्यकांत का सुप्रीम कोर्ट से बड़ा और दोटूक फैसला, सीएम पद पर बने रहेंगे थलपति विजय

दक्षिण भारत की राजनीति और विशेषकर तमिलनाडु के सियासी गलियारों में पिछले काफी समय से जारी अनिश्चितता और तनाव पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने पूर्णविराम लगा दिया है। तमिलनाडु में मौजूदा सरकार को गिराकर राष्ट्रपति शासन (President's Rule in Tamil Nadu) लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त और दोटूक फैसला सुनाया है। माननीय मुख्य न्यायाधीश ने याचिका में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह 'बेबुनियाद' और राजनीति से प्रेरित करार देते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया है। उच्चतम न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि थलपति विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद पर मजबूती से बने रहेंगे और उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है।

सीजेआई सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी: लोकतांत्रिक रूप से चुनी सरकार को गिराना मजाक नहीं

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी राज्य में लोकतांत्रिक तरीके से और जनता के भारी बहुमत से चुनी गई सरकार को महज राजनीतिक मतभेदों या बेबुनियाद आरोपों के आधार पर बर्खास्त नहीं किया जा सकता। राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) का इस्तेमाल बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की याचिकाएं न केवल अदालत का कीमती समय बर्बाद करती हैं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बेवजह का भ्रम पैदा करती हैं।

मुख्यमंत्री विजय के खेमे में जश्न: विपक्ष को लगा बड़ा कूटनीतिक झटका

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आते ही चेन्नई से लेकर दिल्ली तक मुख्यमंत्री विजय की पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जश्न का माहौल बन गया है। पार्टी मुख्यालय के बाहर समर्थक आतिशबाजी कर रहे हैं और मिठाइयां बांट रहे हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से सीएम विजय की राजनीतिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभरी है। दूसरी तरफ, राज्य की विपक्षी पार्टियों को इस फैसले से बहुत बड़ा झटका लगा है, जो कानून-व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक मुद्दों का हवाला देकर लगातार विजय सरकार को घेरने और केंद्र सरकार से दखल देने की मांग कर रही थीं।

तमिलनाडु की राजनीति पर क्या होगा इस फैसले का असर?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के दूरगामी राजनीतिक और भौगोलिक परिणाम होने वाले हैं। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और तिरुचिरापल्ली जैसे तमिलनाडु के प्रमुख शहरों और स्थानीय जिलों में इस फैसले के बाद राजनीतिक स्थिरता आएगी, जिससे ठप पड़े विकास कार्यों को एक बार फिर रफ्तार मिल सकेगी। मुख्यमंत्री विजय अब बिना किसी मानसिक और राजनीतिक दबाव के अपनी कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को धरातल पर उतार सकेंगे। इसके साथ ही, इस फैसले ने देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण पेश किया है कि केवल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के इरादे से चुनी हुई सरकारों के काम में बाधा नहीं डाली जा सकती।