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‘जिंदा हैं तो लौटा दो, मर गए तो डेथ सर्टिफिकेट दे दो’: पाकिस्तानी सेना के जुल्मों के खिलाफ बलोच एक्टिविस्ट सम्मी दीन का खुला पत्र, बयां किया 17 साल का दर्द!

बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के खिलाफ बलोच नागरिकों का गुस्सा एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. बलोच विद्रोह और आजादी की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्दयता के साथ किए जा रहे अपहरण, जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances) और 'किल एंड डंप' नीति के खिलाफ प्रमुख बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच (Sammi Deen Baloch) ने एक दिल दहला देने वाला खुला पत्र लिखा है.

अपने इस पत्र के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार और सेना से अपने लापता पिता को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं. सम्मी दीन बलोच ने अपनी भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाली अपील में लिखा है, "अगर मेरे अब्बा जिंदा हैं तो उन्हें वापस लौटा दो और अगर आपने उन्हें मार दिया है, तो हमें और तड़पाने के बजाय उनका डेथ सर्टिफिकेट दे दो." इस खुले पत्र ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकारों के हनन और बलोच नरसंहार को बेनकाब कर दिया है.

17 साल का अंतहीन इंतजार: डॉ. दीन मोहम्मद बलोच की गुमशुदगी की दर्दनाक कहानी

बलोच एक्टिविस्ट सम्मी दीन बलोच ने अपने पिता डॉ. दीन मोहम्मद बलोच के जबरन अपहरण और लापता होने की 17वीं बरसी पर रविवार (28 जून 2026) को यह खुला पत्र जारी किया. अपनी मार्मिक अपील में सम्मी दीन ने लिखा कि पिछले दो दशकों से चल रही इस अनिश्चितता के बाद अब उनके परिवार को यह जानने का पूरा कानूनी और मानवीय हक है कि उनके पिता किस हाल में हैं.

पेशा से सरकारी चिकित्सक डॉ. दीन मोहम्मद बलोच को 28 जून 2009 की रात बलोचिस्तान के खुजदार जिले से पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और सेना के अधिकारियों ने जबरन हिरासत में लिया था. उस काली रात के बाद से आज तक, यानी पिछले 17 सालों में डॉ. दीन मोहम्मद का कोई अता-पता नहीं है. उनका परिवार आज भी उनकी सुरक्षित वापसी की आस में जी रहा है.

'याचिकाएं, लाठियां और आंसू गैस ही मेरी विरासत बन गईं'

अपने पिता के लापता होने के गहरे दुख और दर्द को बयां करते हुए सम्मी दीन बताती हैं कि वह अपने पिता के जीवित या मृत होने के सच से अनजान रहते हुए ही बड़ी हुईं. उन्होंने अपने पत्र में लिखा, "बचपन में मुझे सिर्फ गुमशुदगी दी गई. जब भी मैंने स्कूल या समाज में अपने पिता के बारे में पूछा, तो मुझे सिर्फ इनकार, दुत्कार और अपमान मिला. मेरे पिता को यह जालिम राज्य उठा ले गया और उनका अंतहीन इंतजार करने की सजा मुझे आजीवन कारावास की तरह दे दी गई."

उन्होंने आगे लिखा, "दुनिया के बाकी बच्चे अपने पिता की उंगली थामकर और उनकी खूबसूरत यादों के साथ बड़े होते हैं. लेकिन मुझे बचपन से ही अदालतों की याचिकाएं, पुलिस की लाठियां, आंसू गैस के गोले और हाथों में पिता के पोस्टर्स लेकर सड़कों पर घूमने की विरासत मिली है. मेरे अब्बा कोई सरकारी फाइल या कोई कोरी अफवाह नहीं थे. वे डॉ. दीन मोहम्मद थे—एक डॉक्टर, एक जिम्मेदार पति और एक बेहद प्यारे पिता, जिन्हें हमसे हमेशा के लिए छीन लिया गया."

अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजी आवाज: जर्मनी के संगठन ने पाकिस्तान को घेरा

सम्मी दीन बलोच आज बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ लड़ने वाली प्रमुख संस्था 'वॉयस फॉर बलोच मिसिंग पर्सन्स' (VBMP) की महासचिव हैं. वह बलोचिस्तान में जबरन गायब किए गए हजारों युवाओं और नागरिकों के इंसाफ की लड़ाई का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय चेहरा बन चुकी हैं. उनके इस शांतिपूर्ण आंदोलन और अदालतों में दायर की जा रही याचिकाओं से बौखलाई पाकिस्तानी सेना और पुलिस कई बार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और उन पर हिंसक हमले भी करवा चुकी है.

सम्मी दीन के इस खुले पत्र के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जर्मनी के डबलिन में स्थित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन 'फ्रंट लाइन डिफेंडर्स' (Front Line Defenders) ने सम्मी दीन बलोच के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया है. संगठन ने पाकिस्तानी हुक्मरानों से मांग की है कि वे डॉ. दीन मोहम्मद बलोच के ठिकाने का तुरंत और आधिकारिक तौर पर खुलासा करें और बलोचिस्तान में चल रहे जबरन गुमशुदगी के सभी मामलों की स्वतंत्र निष्पक्ष जांच कराएं.

पाकिस्तानी सेना का ढिठाई भरा रुख: आरोपों को सिरे से किया खारिज

हमेशा की तरह, इस बार भी पाकिस्तानी सरकार और उसकी सेना ने राजनीतिक उत्पीड़न और बलोच नागरिकों को गायब करने के इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि बलोच कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूरी तरह से देश के कानून के दायरे में है.

सेना ने ढिठाई से बयान जारी करते हुए कहा कि आम नागरिकों को गायब करने की उनकी कोई आधिकारिक नीति नहीं है. पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि जो लोग लापता बताए जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश लोग या तो प्रतिबंधित उग्रवादी और आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए हैं, या वे कानून से बचने के लिए भूमिगत (Underground) हो गए हैं या फिर अपनी मर्जी से देश छोड़कर विदेश चले गए हैं. लेकिन बलोच मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सेना का यह बयान सिर्फ उनके खूनी गुनाहों को छिपाने का एक भद्दा बहाना है.