Wednesday , July 8 2026

Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर दान चोरी मामले में अब तक 8 गिरफ्तार, आरोपी टिन्नू यादव और अखिलेश यादव की कथित बातचीत पर मचा सियासी घमासान

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के दान और चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन पर मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और धांधली करने का गंभीर आरोप है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) गठित की जा चुकी है, जो मंदिर के धन प्रबंधन और चढ़ावे की गिनती से जुड़े हर एक व्यक्ति की भूमिका की सघन जांच कर रही है। वहीं, यह आपराधिक जांच तब एक बड़े सियासी भूचाल में बदल गई, जब इस मामले के मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के तार सीधे समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ने के दावे किए जाने लगे।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के दावे से भड़का नया विवाद

इस पूरे विवाद को हवा तब मिली जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि गिरफ्तार आरोपी टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से फोन पर लगातार बातचीत होती थी। दावों में यहाँ तक कहा गया कि गिरफ्तारी वाले दिन भी दोनों के बीच तीन बार फोन पर बात हुई थी। बीजेपी सांसद ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "टिन्नू टिप्पू से बात कर रहा था।" इस पोस्ट के सामने आते ही उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

अखिलेश यादव ने दी मानहानि और कानूनी कार्रवाई की सीधी चेतावनी

बीजेपी सांसद के इन दावों और सोशल मीडिया पोस्ट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और अन्य नेताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उनके खिलाफ की गई इस विवादित और मनगढ़ंत पोस्ट को तुरंत सोशल मीडिया से नहीं हटाया गया और सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई, तो वे देश की अदालत में उनके खिलाफ सख्त कानूनी और मानहानि की कार्रवाई करेंगे।

आरोपी की कॉल टाइमलाइन खंगाल रही एसआईटी (SIT)

दूसरी तरफ, मामले की जांच कर रही एसआईटी अब इस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन को बेहद बारीकी से खंगाल रही है। दरअसल, मंदिर में दान की कथित चोरी का पहला मामला 5 जून को ही प्रकाश में आ गया था, लेकिन उस दौरान पुलिस द्वारा तुरंत कोई बड़ी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या मामला सार्वजनिक होने और गिरफ्तारी से पहले ही इसकी भनक राजनीतिक दलों के नेताओं तक पहुंच चुकी थी?

टेम्पो चालक से विहिप कार्यकर्ता और फिर मंदिर का 'भरोसेमंद' बना आरोपी

इस मामले में आरोपी बनाए गए रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की पृष्ठभूमि भी बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, टिन्नू यादव पेशे से एक साधारण टेम्पो चालक है। उसने अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहकर धीरे-धीरे मंदिर प्रशासन और वहां के वरिष्ठ पदाधिकारियों का भरोसा जीत लिया। इसी भरोसे के दम पर उसे राम मंदिर में आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के चढ़ावे को इकट्ठा करने और दानपात्र से निकालकर उसकी गिनती करने वाली कोर टीम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसका फायदा उठाकर धांधली को अंजाम दिया गया।

सपा प्रमुख ने किया बचाव, कहा- 'फुंगी को फांसी, शाख को माफी'

इस बीच, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोपी टिन्नू यादव का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद तीखा मुहावरा लिखते हुए लिखा, "फुंगी को फांसी, शाख को माफी"। अखिलेश यादव का सीधा आरोप है कि इस बड़ी धांधली में मंदिर प्रशासन और संस्थाओं से जुड़े बड़े और प्रभावशाली लोगों को पूरी तरह बचाया जा रहा है, जबकि टिन्नू यादव जैसे बेहद छोटे और गरीब स्तर के लोगों को मोहरा बनाकर उन पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने टिन्नू यादव को पूरी तरह निर्दोष बताया है।

क्या यूपी के आगामी चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा राम मंदिर का चढ़ावा?

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार का मानना है कि यह मामला उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के लिए आने वाले समय में राजनीतिक रूप से काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अब लगभग छह महीने का ही समय शेष बचा है। ऐसे में विपक्षी दलों को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने का एक बहुत बड़ा हथियार मिल गया है। विपक्ष इस कथित चोरी को सीधे भाजपा और संघ (RSS) से जुड़े संगठनों की प्रशासनिक नाकामी से जोड़कर पेश कर रहा है।

चूंकि राम मंदिर देश में सिर्फ करोड़ों लोगों की अगाध आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भाजपा का सबसे बड़ा वैचारिक और राजनीतिक एजेंडा भी रहा है, इसलिए इस पवित्र स्थान पर हुआ वित्तीय घोटाला आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दशा और दिशा तय कर सकता है। फिलहाल, एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी के फोन कॉल्स की सच्चाई का पता लगाना और यह साफ करना है कि इन बातचीत का मंदिर की चोरी से कोई सीधा वास्ता था या नहीं।