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आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा’, PM मोदी ने वैश्विक मंच से पाकिस्तान को घेरा; ऑस्ट्रेलियाई PM के तल्ख तेवर ने बढ़ाई मुसीबत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर वैश्विक मंच से आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया है। पीएम मोदी ने दोटूक शब्दों में कहा कि 'आतंकवाद केवल एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।' उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया कि जो देश आतंकवाद को पनाह देते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें बेनकाब करना समय की मांग है। प्रधानमंत्री का यह बयान सीधे तौर पर उन पड़ोसी मुल्कों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपनी सरजमीं का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस मौके पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भी मोदी के सुर में सुर मिलाते हुए पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया और कड़े शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मच गई है।

PM मोदी की दोटूक: आतंक के पनाहगारों को नहीं मिलेगी छूट

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसी भी देश का नाम लिए बिना यह साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती और यह वैश्विक स्थिरता के लिए जहर के समान है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को यह समझ लेना चाहिए कि अब दुनिया इसे और अधिक बर्दाश्त नहीं करेगी। उनका यह बयान भारत की उस कूटनीतिक जीत को दर्शाता है, जिसमें भारत लगातार दुनिया को आतंकवाद के खतरों से आगाह कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस सराहना और समर्थन से यह साफ हो गया है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का वैश्विक कद अब काफी ऊंचा हो चुका है।

ऑस्ट्रेलियाई PM का तल्ख तेवर, पाकिस्तान के लिए बढ़ी मुश्किल

पीएम मोदी के बयान का समर्थन करते हुए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भी बेहद तल्ख तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद का समूल नाश अनिवार्य है। ऑस्ट्रेलियाई PM द्वारा पाकिस्तान को इस तरह से घेरा जाना कूटनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत और ऑस्ट्रेलिया की गहरी दोस्ती और साझा सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि दोनों शीर्ष नेताओं का एक साथ खड़े होना और आतंकवाद पर स्पष्ट राय रखना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय झटका है। इस साझा विरोध ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि को और भी अधिक नुकसान पहुंचाया है और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर अलग-थलग कर दिया है।