
हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका के साथ चल रही अनबन और बढ़ते तनाव के बीच नेतन्याहू का 'भारत का नाम लेना' कई गंभीर संकेत दे रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि 'जो मैं भारत के साथ कर रहा हूं, वही इजरायल के लिए भी अपनाऊंगा।' इस बयान ने न केवल विशेषज्ञों को चौंकाया है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इजरायल अब अपने रणनीतिक संबंधों के लिए भारत को एक 'मॉडल' के रूप में देख रहा है? आइए समझते हैं इजरायल का यह नया कूटनीतिक गेम प्लान।
क्या भारत को 'रोल मॉडल' मान रहे नेतन्याहू?
नेतन्याहू के इस बयान के गहरे अर्थ निकाले जा रहे हैं। भारत और इजरायल के बीच पिछले एक दशक में रक्षा, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में जो मजबूत साझेदारी बनी है, वह दुनिया के लिए एक उदाहरण है। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) के लिए जाना जाता है, यानी किसी एक महाशक्ति के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के फैसले लेना। नेतन्याहू का यह इशारा संभवतः इसी ओर है कि इजरायल अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर भारत की तरह खुद को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर विदेश नीति के साथ ढालना चाहता है।
इजरायल का नया प्लान: स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता
इजरायल का नया प्लान केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भी एक बड़ा कदम है। नेतन्याहू का मानना है कि जिस तरह भारत ने अपनी शर्तों पर वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध बनाए हैं, उसी तरह इजरायल भी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अब किसी एक देश के भरोसे नहीं रहना चाहता। इस कूटनीति का सीधा मतलब है कि इजरायल अब अपने पड़ोसियों और अन्य वैश्विक मंचों पर अपनी शर्तों को प्राथमिकता देगा। यह बदलाव निश्चित रूप से मिडिल ईस्ट के समीकरणों को बदल सकता है और आने वाले समय में भारत-इजरायल के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ कर सकता है।
UK News