
Medanta Doctor Negligence Case: चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली एक बेहद सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां मेदंता अस्पताल के डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण एक महिला मरीज की जान आफत में पड़ गई है। डॉक्टरों द्वारा समय पर सही निर्णय न लिए जाने के कारण अस्पताल से लौटते वक्त रास्ते में ही महिला का सर्जिकल घाव अचानक जोर से फट गया। इस खौफनाक मंजर के बाद पीड़ित परिवार ने मेदंता अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (Medical Superintendent) से लिखित में जवाब तलब करते हुए दोषी मेडिकल टीम पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानिए कैसे शुरू हुआ यह पूरा मामला और लापरवाही का सफर
यह दर्दनाक मामला पीड़ित महिला मरीज (UHID: ML10526989) से जुड़ा है, जो पिछले एक महीने से अधिक समय से मेदंता के सर्जन डॉ. रोमा प्रधान और डॉ. अमित अग्रवाल की देखरेख में अपना इलाज करवा रही थीं। हाल ही में हुए एक बड़े ऑपरेशन के बाद मरीज को हैवी एंटीबायोटिक्स पर रखा गया था और संक्रमण से बचाव के लिए नियमित रूप से ड्रेसिंग की जा रही थी। शनिवार, 11 जुलाई 2026 को शाम लगभग 6:00 बजे जब मरीज अपनी तय ड्रेसिंग के लिए मेदंता अस्पताल पहुंची, तो डॉक्टरों ने उनके घाव की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान डॉक्टरों ने खुद यह नोट किया कि घाव के अंदर भारी मात्रा में तरल पदार्थ और मवाद (Pus) जमा हो रहा है, जिसे बिना वक्त गंवाए तुरंत चीरा (Incision) लगाकर बाहर निकालना बेहद जरूरी था।
इमरजेंसी को किया नजरअंदाज, रास्ते में लहूलुहान हुई मरीज
घाव में तेजी से बढ़ रहे एक्टिव इन्फेक्शन और गंभीर आपातकालीन स्थिति को पूरी तरह समझने में डॉक्टरों की सूझबूझ फेल साबित हुई। मेदंता की मेडिकल टीम ने इस अत्यंत संवेदनशील और तत्काल किए जाने वाले प्रोसीजर को उसी वक्त करने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए दो दिन बाद यानी सोमवार, 13 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दिया। डॉक्टरों के इस लापरवाह फैसले का खामियाजा मरीज को कुछ ही मिनटों में भुगतना पड़ा। अस्पताल परिसर से निकलकर घर वापस लौटते समय रास्ते में ही महिला का सर्जिकल घाव अचानक फट गया। देखते ही देखते पूरी गॉज ड्रेसिंग खून और मवाद से लथपथ हो गई। अगले दिन रविवार होने की वजह से पीड़ित को समय पर इमरजेंसी ट्रीटमेंट मिलना दूभर हो गया, जिससे अब मरीज के पूरे शरीर में जानलेवा सिस्टेमिक इन्फेक्शन फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
नौकरी छूटी और पैसा भी डूबा, परिजनों ने मांगा जवाबदेही का हिसाब
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल के सभी प्रोटोकॉल का पूरी ईमानदारी से पालन किया और महंगे इलाज के लिए मेदंता द्वारा मांगे गए एक-एक पैसे का समय पर भुगतान किया। इसके बावजूद डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने मरीज को शारीरिक और मानसिक रूप से अपंगता की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। लगातार बिगड़ती तबीयत के कारण महिला को अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा है। पीड़ित परिवार ने मेदंता अस्पताल प्रशासन को एक कड़ा औपचारिक शिकायत पत्र भेजकर सीधे सवाल किया है कि इस गंभीर शारीरिक शोषण, समय की बर्बादी, भारी-भरकम आर्थिक नुकसान और मानसिक आघात की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि अस्पताल ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए और दोषी डॉक्टरों पर एक्शन नहीं लिया, तो वे इस मामले को उपभोक्ता अदालत और मेडिकल काउंसिल तक लेकर जाएंगे।
UK News