
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में इन दिनों पाकिस्तान सरकार की तानाशाही अपने चरम पर पहुंच चुकी है। स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना हर हद पार कर रही है। हालात यह हैं कि वहां हो रहे मानवाधिकार हनन और क्रूरता को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए अब मीडिया के गले पर भी कैंची चलाई जा रही है। स्थानीय जनता की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तान ने पहले तो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाईं और अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों पर भी पाबंदी लगानी शुरू कर दी है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल अल-जजीरा पर लगाया बैन
PoK के भीतर पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसियों के काले कारनामों को उजागर करने वाले प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थान 'अल-जजीरा' के प्रसारण और कवरेज पर पाकिस्तान ने रोक लगा दी है। जब अल-जजीरा की टीम ने वहां के स्थानीय लोगों पर हो रहे अत्याचार, सेना की बर्बरता और कश्मीरी अवाम के गुस्से को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की, तो बौखलाई पाकिस्तानी सरकार ने तुरंत सेंसरशिप लागू कर दी। इस बैन का मुख्य मकसद यह है कि PoK की जमीनी सच्चाई किसी भी तरह से वैश्विक मंचों तक न पहुंच सके और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर कोई दाग न लगे।
गोलियों और दमन के दम पर जनता की आवाज दबाने की कोशिश
कुछ समय पहले PoK के विभिन्न इलाकों में बढ़े हुए बिजली के बिल, महंगाई और पाकिस्तानी हुक्मरानों के शोषण के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन नागरिकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें कई बेकसूर लोग मारे गए और सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हो गए। इस खूनी संघर्ष के बाद से ही पूरा क्षेत्र सुलग रहा है, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन मीडिया को प्रतिबंधित कर इस नरसंहार और दमन चक्र को पूरी तरह से छिपाने की नापाक कोशिश में जुटा हुआ है।
वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर सवाल
पाकिस्तान के इन अलोकतांत्रिक और तानाशाही कदमों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान दुनिया भर में मानवाधिकारों की दुहाई देता फिरता है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही कब्जे वाले क्षेत्र में वह फासीवादी नीतियां अपना रहा है। जानकारों का कहना है कि सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटकर पाकिस्तान ज्यादा दिनों तक अपनी इन करतूतों को छिपा नहीं पाएगा, क्योंकि वहां की जनता का आक्रोश अब ज्वालामुखी का रूप ले चुका है।
UK News