
बिजनेस ट्रिप या छुट्टियों पर जाने के बाद अक्सर लोग होटलों, रिसॉर्ट्स या एयरपोर्ट्स पर मिलने वाले मुफ्त वाई-फाई (Free Hotel Wi-Fi) से अपने लैपटॉप और स्मार्टफोन तुरंत कनेक्ट कर लेते हैं। लेकिन यह सहूलियत अब आपके निजी डेटा और सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। माइक्रोसॉफ्ट थ्रेट इंटेलिजेंस (Microsoft Threat Intelligence) ने दुनिया भर में यात्रा करने वाले लोगों, खासकर कॉर्पोरेट एक्जीक्यूटिव्स और पर्यटकों के लिए एक गंभीर वैश्विक अलर्ट जारी किया है। रिसर्चर्स के मुताबिक, साइबर अपराधियों और एडवांस्ड हैकर्स ने होटल के नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को अपना नया हथियार बना लिया है और वे यात्रियों के डिवाइस में घुसपैठ कर उनकी जासूसी कर रहे हैं।
'CaptiveCrunch' अभियान: जानें कैसे काम कर रहा है यह हैकिंग नेटवर्क
माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स 'CaptiveCrunch' नाम के एक जटिल और परिष्कृत हैकिंग अभियान का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तकनीक के तहत हैकर्स होटल के वाई-फाई राउटर या उस लॉगिन गेटवे को हाईजैक कर लेते हैं जिसे 'कैप्टिव पोर्टल' (Captive Portal) कहा जाता है।
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फर्जी लॉगिन पेज और सिस्टम पॉप-अप: जब भी कोई यात्री होटल के वाई-फाई से जुड़ने की कोशिश करता है, तो स्क्रीन पर होटल के नाम का एक ऑथेंटिकेशन पेज खुलता है। वाई-फाई कनेक्ट होते ही यूज़र के डिवाइस पर अचानक 'Windows Update Required', 'Microsoft 365 Authentication' या 'Browser Update Needed' जैसी नकली पॉप-अप विंडो दिखाई देने लगती है।
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मालवेयर की साइलेंट एंट्री: जब कोई यूजर इस पॉप-अप को असली अपडेट मानकर उस पर क्लिक कर देता है, तो बैकग्राउंड में 'CornFlake' या 'ChocoShell' नाम का खतरनाक स्पाईवेयर या रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RAT) उनके लैपटॉप/स्मार्टफोन में डाउनलोड और इंस्टॉल हो जाता है।
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कैमरा, माइक और बैंकिंग डेटा पर कब्जा: एक बार जब यह मालवेयर सिस्टम में इंस्टॉल हो जाता है, तो हैकर्स यूजर के कीबोर्ड से टाइप किए जाने वाले हर एक शब्द (Keylogger) को ट्रैक कर लेते हैं। इससे वे क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, बैंक पासवर्ड, कॉरपोरेट ईमेल और व्यक्तिगत फाइल्स चुरा लेते हैं। यही नहीं, हैकर्स बैकग्राउंड में यूजर के लैपटॉप का वेबकैम और माइक्रोफोन ऑन करके उनकी जासूसी भी करने में सक्षम हैं।
पब्लिक और होटल वाई-फाई पर क्यों मंडरा रहा है ज्यादा खतरा?
अधिकांश होटल और रिसॉर्ट्स अपने वाई-फाई नेटवर्क के राउटर सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी पैच को लंबे समय तक अपडेट नहीं करते हैं। कमजोर एन्क्रिप्शन (Weak Encryption) और लचर नेटवर्क सिक्योरिटी का फायदा उठाकर हैकर्स आसानी से 'मैन-इन-द-मिडिल' (MitM) अटैक को अंजाम देते हैं। इस तरह के अटैक में हैकर यूजर और इंटरनेट सर्वर के बीच बैठकर सभी डेटा ट्रांजैक्शन को चुपचाप पढ़ लेता है।
होटल वाई-फाई की जासूसी और हैकिंग से बचने के लिए क्या करें?
यदि आप अक्सर यात्रा करते हैं और होटल या एयरपोर्ट के वाई-फाई का उपयोग करते हैं, तो साइबर विशेषज्ञों द्वारा बताए गए इन सुरक्षा उपायों को जरूर अपनाएं:
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निजी मोबाइल हॉटस्पॉट का इस्तेमाल करें: हो सके तो अनजान और अन-एन्क्रिप्टेड होटल वाई-फाई से कनेक्ट होने के बजाय अपने स्मार्टफोन के मोबाइल डेटा और हॉटस्पॉट (Personal Hotspot) का ही उपयोग करें।
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पॉप-अप्स पर क्लिक न करें: यदि वाई-फाई कनेक्ट करते ही आपको किसी भी प्रकार का अपडेट डाउनलोड करने या कोई नया सर्टिफिकेट इंस्टॉल करने को कहा जाए, तो उसे तुरंत ब्लॉक या कैंसिल कर दें।
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विश्वसनीय VPN (Virtual Private Network) का उपयोग करें: यदि होटल का वाई-फाई इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो, तो ब्राउजिंग शुरू करने से पहले हमेशा एक भरोसेमंद और एन्क्रिप्टेड VPN ऑन कर लें। यह आपके डेटा ट्रैफिक को पूरी तरह से एन्क्रिप्ट कर देता है।
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'Auto-Connect' बंद रखें: अपने फोन और लैपटॉप की सेटिंग्स में जाकर 'Auto-Connect to Open Wi-Fi' का विकल्प हमेशा बंद (Off) रखें, ताकि आपका डिवाइस किसी भी असुरक्षित नेटवर्क से खुद-ब-खुद न जुड़े।
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टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन रखें: अपने सभी संवेदनशील सोशल मीडिया, ईमेल और बैंकिंग ऐप्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर लागू करें, ताकि पासवर्ड लीक होने के बावजूद कोई आपके अकाउंट का गलत इस्तेमाल न कर सके।
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