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‘लाल किला झूठ बोलने की जगह नहीं है…’, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अखिलेश यादव का पीएम मोदी के भाषण पर तीखा तंज

देशभर में स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय पर्व अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इस अवसर पर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी भी चरम पर है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से दिए गए स्वतंत्रता दिवस के संबोधन पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें महिला आरक्षण विधेयक का जिक्र किया गया था। सपा प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा कि लाल किला देश का सबसे प्रतिष्ठित स्थान है और यह झूठ बोलने की जगह नहीं है, इसलिए वहां से ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए।

महिला आरक्षण पर अखिलेश का सरकार को सीधा चैलेंज

अखिलेश यादव ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि हर कोई जानता है कि महिला आरक्षण कानून वर्ष 2023 में ही संसद से सफलतापूर्वक पारित हो चुका है। ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा इस पर नए सिरे से बात करना और सहयोग की अपील करना सही नहीं है। सपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में महिलाओं को उनका हक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के प्रति गंभीर हैं, तो इस महिला आरक्षण कानून को आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तुरंत लागू करके दिखाएं। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी इसके लिए पूरी तरह से तैयार है, जिससे उन योग्य महिलाओं को भी चुनाव लड़ने का अवसर मिल सकेगा जो लंबे समय से अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। यादव का मुख्य इशारा सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' की ओर था, जो 2024 के लोकसभा चुनावों में लागू नहीं हो पाया था।

'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' को लेकर भाजपा पर बड़ा हमला

सपा अध्यक्ष ने देश में मनाए जाने वाले 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के आयोजनों को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा और उनके छिपे हुए सहयोगी इस दिन को मनाते हैं क्योंकि उनके लिए देश का विभाजन एक 'जश्न मनाने का विषय' रहा है। अखिलेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक आंदोलन में उन लोगों का योगदान रहा हो या नहीं, लेकिन देश के विभाजन के समय उनकी भूमिका अवश्य रही थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश केवल संविधान के दायरे और उसकी मूल भावनाओं से चलता है, और यदि देश के लोकतंत्र को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, तो हम सभी को मिलकर संविधान को और अधिक मजबूत करना होगा।

तिरंगे और राष्ट्रवाद को लेकर खड़े किए तीखे सवाल

तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उनका राष्ट्रवाद केवल एक रंग तक सीमित है, जबकि समाजवादी राष्ट्रवाद 'बहुरंगी' है जो हर वर्ग और हर विचार को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में कई ऐसे स्थान और संगठन रहे हैं जहां कभी राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा नहीं फहराया गया था। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को अब कम से कम 'हर मन तिरंगा' अभियान चलाना चाहिए ताकि वे देश की जनता को यह साबित कर सकें कि उनके दिलों में भी आम नागरिकों जैसी सच्ची राष्ट्रभक्ति की भावना मौजूद है।

प्रति व्यक्ति आय, राशन वितरण और महंगाई पर घेरी सरकार

अखिलेश यादव ने देश और उत्तर प्रदेश के आर्थिक हालातों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार देश की प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के बड़े-बड़े दावे करती है, तो दूसरी तरफ देश के करोड़ों परिवारों को मुफ्त राशन देना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया में शायद ही कोई ऐसा अन्य देश होगा जहां गरीबों को इतनी विशाल मात्रा में मुफ्त राशन उपलब्ध कराना पड़ता हो, और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राज्य में यह स्थिति और भी गंभीर है। इसके साथ ही उन्होंने देश में लगातार बढ़ रही महंगाई, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों, खाद्य पदार्थों में मिलावट और विदेशी नीतियों के कारण प्रभावित हो रही अर्थव्यवस्था को लेकर भी सरकार की कड़ी आलोचना की।

शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और प्राथमिक स्कूलों के बंद होने का मुद्दा

शिक्षा के क्षेत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि भारत में शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे बेहद कमजोर होती जा रही है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि विकसित देशों में हमेशा से शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाती है, जबकि भारत में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। अखिलेश यादव ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि देश में सबसे अधिक प्राथमिक विद्यालय उत्तर प्रदेश राज्य में बंद किए गए हैं। उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा कि अकेले उत्तर प्रदेश में करीब 26 हजार स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि पूरे देश भर में लगभग एक लाख प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लग चुके हैं, जो देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बड़ा संकट है।