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अगले 5 दिन भारी! एमपी, यूपी, बिहार और राजस्थान समेत 15 राज्यों में मूसलाधार बारिश का रेड-ऑरेंज अलर्ट; IMD ने दी आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली की चेतावनी

देशभर में सक्रिय मानसून एक बार फिर विकराल रूप धारण करने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा मौसम बुलेटिन जारी करते हुए देश के कई हिस्सों में अगले 5 दिनों तक संभलकर रहने की सख्त चेतावनी दी है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area), सक्रिय मॉनसून ट्रफ और उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के मेल से एक बेहद मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय हो गया है।

इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और गुजरात के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश के साथ-साथ 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों से सतर्कता बरतने की अपील की है।

मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ अति भारी बारिश का दौर, नदियां उफान पर

मध्य प्रदेश में मानसूनी तंत्र के अत्यधिक मजबूत होने के कारण राज्य के अधिकांश संभागों में लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, छिंदवाड़ा और ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

लगातार हो रही मानसूनी बारिश के चलते नर्मदा, बेतवा, चंबल, ताप्ती और क्षिप्रा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई प्रमुख बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़े जाने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति और जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों और निचले क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली (वज्रपात) का संकट

उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में मॉनसून ट्रफ के खिसकने से व्यापक मौसमी बदलाव देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई बेल्ट के जिलों—जैसे गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गाजीपुर, बलिया, बहराइच, लखीमपुर खीरी और लखनऊ के आसपास के इलाकों में अगले 5 दिनों तक गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है।

वहीं बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया और पूर्वी चंपारण जिलों में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने (Lightning Strike) का बड़ा खतरा बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और खुले खेतों में काम करने वाले किसानों को बादलों की तेज गर्जना के दौरान पक्के मकानों में शरण लेने की सलाह दी है।

पहाड़ी राज्यों में लैंडस्लाइड का खतरा, राजस्थान और गुजरात में अलर्ट

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते भूस्खलन (Landslide), बोल्डर गिरने और सड़कों के अवरुद्ध होने का संकट और गहरा सकता है। चारधाम यात्रा मार्गों—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हाइवे पर संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन्स पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक पर्वतीय यात्राओं से बचने की चेतावनी दी गई है।

पश्चिमी भारत में पूर्वी राजस्थान (जयपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर) और गुजरात के कई हिस्सों में तेज हवाओं और आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का दौर अगले 3 से 5 दिनों तक जारी रहने की संभावना है। सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा, उमस से राहत और जलभराव की चेतावनी

राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में अगले 5 दिनों के दौरान आसमान में घने बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ इलाकों में तेज बारिश के स्पेल देखने को मिल सकते हैं, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, तेज बारिश के कारण प्रमुख सड़कों और अंडरपासों में ट्रैफिक जाम और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

मौसम विभाग (IMD) की सुरक्षा एडवाइजरी

खराब मौसम और संभावित प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर मौसम विभाग ने जनता और प्रशासन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, जर्जर दीवारों और बिजली के खंभों के नीचे बिल्कुल खड़े न हों।

  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग रखें और जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाने से बचें।

  • किसान अपनी कटी या तैयार फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और कीटनाशकों का छिड़काव मौसम साफ होने तक टाल दें।

  • किसी भी आपात स्थिति के लिए स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRF/SDRF) और जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबरों से जुड़े रहें।