
वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक अनिश्चितताओं और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य के बीच भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र (Developed Nation) बनाने के अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को गति देने के लिए एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। केंद्र सरकार अब 'विकसित भारत 2047' के व्यापक रोड मैप को एक नया और व्यावहारिक आयाम देने की अंतिम तैयारियों में जुट गई है। इसी दूरगामी रणनीति के तहत बुधवार, 23 सितंबर और गुरुवार, 24 सितंबर 2047 को मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) की एक उच्चस्तरीय दो दिवसीय 'चिंतन बैठक' (Chintan Shivir) का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष शिविर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश के भविष्य के आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन जैसे अतिसंवेदनशील विषयों पर मंथन किया जाएगा।
मंत्रिपरिषद की दो दिवसीय चिंतन बैठक: 8 से 10 प्रमुख प्रेजेंटेशन और मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश
राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय चिंतन शिविर में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा लगभग आठ से दस उच्च-स्तरीय प्रस्तुतियां (Presentations) दी जाएंगी। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल पुरानी योजनाओं की समीक्षा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी मंत्रालय अपने नीतिगत फैसलों के क्रियान्वयन की गति को तेज करें। विकास की दिशा इस प्रकार तय की जा रही है कि वह न केवल दीर्घकालिक और स्थायी हो, बल्कि देश के आम नागरिकों को उसका तात्कालिक आर्थिक लाभ भी प्रत्यक्ष रूप से मिल सके। सरकार का यह प्रयास है कि समय के साथ नीतियों में जरूरी फेरबदल कर देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे रखा जाए।
दोहरी चुनौतियों का सामना: वैश्विक सप्लाई चेन और घरेलू रोजगार पर विशेष फोकस
वर्तमान समय में सरकार के नीति-निर्माताओं के समक्ष दो अलग-अलग मोर्चों पर बड़ी और जटिल चुनौतियां खड़ी हैं। पहली चुनौती पूरी तरह से वैश्विक प्रकृति की है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का बाधित होना, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उतार-चढ़ाव, आयात-निर्यात के समीकरण और आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) से जुड़े रणनीतिक सवाल शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर, घरेलू स्तर पर रोजगार सृजन, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे गंभीर सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक मुद्दे प्राथमिकता पर हैं। इस चिंतन शिविर में इन सभी विषयों को केंद्र में रखकर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि वैश्विक झटकों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखते हुए देश के भीतर रोजगार के नए और विशाल अवसर पैदा किए जा सकें।
सचिवों के दस समूहों की रिपोर्ट और 'ईज ऑफ लिविंग' पर जोर
वर्ष 2021 में सरकार द्वारा देश के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों (Sectors) के लिए सचिवों के 10 अलग-अलग समूहों का गठन किया गया था। इन समूहों ने विभिन्न उद्योगपतियों, विशेषज्ञों और स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के साथ विस्तृत चर्चा कर विकास का एक ब्लू-प्रिंट तैयार किया है। इस चिंतन शिविर के दौरान उन सभी समूहों के प्रजेंटेशन पर गहन चर्चा की जाएगी और अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे मंत्रिसमूह को संबोधित कर भविष्य का स्पष्ट विजन देश के सामने रखेंगे। सरकार का मुख्य जोर 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवन को सुगम बनाना) के साथ-साथ उद्योग और व्यापार जगत में राह का रोड़ा बनने वाले पुराने और जटिल कानूनी प्रावधानों को पूरी तरह समाप्त करने पर रहेगा।
मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा
भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने के लिए सप्लाई चेन के हर स्तर पर आत्मनिर्भरता हासिल करने हेतु कई बड़े और संरचनात्मक सुधार किए जाने की संभावना है। उन उद्योगों और क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी जो देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने की क्षमता रखते हैं। इसके साथ ही 'स्किल डेवलपमेंट' (कौशल विकास) सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, और शिविर के दौरान युवाओं को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी मंत्रियों और सचिवों को आपसी संवाद और समन्वय को और अधिक मजबूत करने के निर्देश देंगे, ताकि विकसित भारत के इस महा-अभियान को तय समय सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।
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