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गोरखपुर में शोभायात्रा के बीच सायरन की आवाज सुनते ही ठहरे सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सख्त प्रशासनिक फैसलों, ताबड़तोड़ दौरों और कानून व्यवस्था की मिसाल के लिए तो पूरे देश में जाने ही जाते हैं, लेकिन कई बार उनकी सादगी और मानवीय संवेदनाएं ऐसी होती हैं जो हर आम इंसान का दिल जीत लेती हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसा ही दिल को छू लेने वाला और प्रेरणादायक वाकया सामने आया है जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि एक जननेता के लिए आम जनता की जान और उसकी तकलीफें सबसे पहले आती हैं। गोरखपुर में एक भव्य शोभायात्रा और भारी जनसमूह के बीच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काफिला गुजर रहा था, तभी अचानक दूर से किसी एंबुलेंस का सायरन सुनाई दिया। आमतौर पर वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा कारणों से रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया जाता है और किसी भी अन्य वाहन को गुजरने की अनुमति नहीं होती है, लेकिन सीएम योगी ने अपनी सुरक्षा और काफिले की परवाह न करते हुए एक पल गंवाए बिना जो किया, उसने वहां मौजूद हर शख्स को हैरान और भावुक कर दिया। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरे वाकये की पूरी कहानी और कैसे मुख्यमंत्री ने एक बार फिर जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की अनूठी मिसाल पेश की।

भव्य शोभायात्रा और जनसैलाब के बीच अचानक गूंजी एंबुलेंस की सायरन की आवाज

घटना उस समय की है जब गोरखपुर शहर में किसी बड़े धार्मिक या सामाजिक आयोजन के सिलसिले में सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ा हुआ था। चारों तरफ उत्सव का माहौल था, ढोल-नगाड़ों की गूंज थी और लोग शोभायात्रा का हिस्सा बनने के लिए सड़कों के दोनों किनारों पर खड़े थे। ऐसे में प्रोटोकॉल के तहत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काफिला भी उसी मार्ग से गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। भारी भीड़भाड़ और सुरक्षा के पुख्ता पहरे के बीच अचानक हवा में एक एंबुलेंस के लगातार बजते हुए सायरन की तीखी आवाज गूंजी। इस तरह के आयोजनों में अक्सर ट्रैफिक जाम होने के कारण एंबुलेंस के फंसने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है, और मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए हर एक सेकंड की कीमत बहुमूल्य होती है। जैसे ही एंबुलेंस की वह आवाज मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात कर्मियों और खुद सीएम योगी तक पहुंची, उन्होंने बिना एक पल की भी देरी किए तुरंत अपने काफिले की गाड़ियों की गति धीमी करने का निर्देश दिया ताकि उस आपातकालीन वाहन को सुरक्षित रास्ता मिल सके।

सीएम योगी ने खुद रुकवाया अपना काफिला और मौके पर संभाली ट्रैफिक व्यवस्था की कमान

एक सामान्य नागरिक की तरह संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत अपने काफिले के ड्राइवरों को गाड़ियां रोकने का आदेश दिया। यही नहीं, सीएम ने अपनी गाड़ी के शीशे से हालात का जायजा लिया और देखा कि ट्रैफिक में एक एंबुलेंस बुरी तरह फंसी हुई है और उसमें सवार मरीज का जीवन खतरे में हो सकता है। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही उनकी सुरक्षा में तैनात एसपीजी और स्थानीय पुलिस के जवान तुरंत हरकत में आ गए। खुद मुख्यमंत्री ने अपनी नजरों के सामने एंबुलेंस को सुरक्षित तरीके से निकलवाने के लिए सड़क पर मोर्चा संभाला और पुलिसकर्मियों को निर्देश देकर तत्काल प्रभाव से एंबुलेंस के आगे का रास्ता पूरी तरह खाली कराया। एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के उस भीड़भाड़ वाले इलाके से तेजी से अस्पताल की ओर रवाना किया गया। जब एंबुलेंस सुरक्षित तरीके से वहां से गुजर गई और सायरन की आवाज दूर चली गई, उसके बाद ही मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ा। वहां मौजूद हजारों की संख्या में आम जनता और राहगीरों ने जब इस पूरी घटना को अपनी आंखों से देखा, तो हर किसी के मुंह से अनजाने ही मुख्यमंत्री के इस मानवीय कदम की प्रशंसा के शब्द निकल पड़े।

जननेता की इस संवेदनशीलता पर सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ हो रही है जमकर सराहना

यह कोई पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता के बीच इस तरह का मानवीय और जमीन से जुड़ा हुआ रवैया दिखाया हो। वे अक्सर अपने दौरों के दौरान आम जनता की समस्याएं सुनने, सीधे फरियादियों से मिलने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद के आदेश देने के लिए जाने जाते हैं। इस घटना का वीडियो और खबर जैसे ही सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया चैनलों पर वायरल हुई, वैसे ही लोगों ने सीएम योगी की इस दरियादिली और संवेदनशीलता की खुले दिल से तारीफ करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि वीवीआईपी कल्चर के इस दौर में जहां अक्सर आम आदमी को नेताओं के काफिले की वजह से घंटों जाम में फंसना पड़ता है, वहीं एक मुख्यमंत्री का खुद एंबुलेंस के लिए अपना रास्ता रोककर मानवता का परिचय देना एक बहुत बड़ा और अनुकरणीय संदेश है। इस एक घटना ने यह साबित कर दिया कि पद और कुर्सी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, लेकिन इंसानियत और जनसेवा का भाव सबसे ऊपर होना चाहिए, और योगी आदित्यनाथ ने अपने इस आचरण से एक बार फिर यह दिखा दिया कि वे जनता के सच्चे सेवक और रक्षक हैं।