अमेरिकी मध्यावधि चुनाव (US Midterm Elections) के चौंकाने वाले नतीजों के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें वॉल स्ट्रीट पर टिक गई हैं। संसद के दोनों सदनों (सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा नियंत्रण हासिल करने की खबरों के बीच अमेरिकी शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और चुनिंदा सेक्टर्स में तेज बिकवाली का दौर देखने को मिला। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डिफेंस और टेक्नोलॉजी से जुड़ी दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर तीखा दबाव बना, जिससे नैस्डैक और एसएंडपी-500 में खासी हलचल मच गई। सत्ता संतुलन में आए इस बड़े राजनीतिक बदलाव ने निवेशकों के बीच आने वाली सरकारी नीतियों, कॉरपोरेट टैक्स, नियमन (रेगुलेशन) और रक्षा बजट को लेकर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। बाजार की इस उथल-पुथल ने आम अमेरिकी नागरिकों के रिटायरमेंट फंड्स (401k) पर भी असर डाला है, जिसके चलते दलाल स्ट्रीट से लेकर वैश्विक बाजारों तक हलचल तेज हो गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप का तीखा हमला: 'यह गिरावट रिपब्लिकन नहीं, डेमोक्रेट्स की वजह से'
अमेरिकी शेयर बाजार में आई तेज गिरावट और निवेशकों को हुए नुकसान पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर सीधा और आक्रामक बयान जारी किया है। ट्रंप ने इस बाजार गिरावट के लिए अपनी प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह सब चुनावों में उनके नियंत्रण की वजह से हुआ है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि अमेरिकी शेयर बाजार ने चुनावी नतीजों के आधार पर इतिहास के सबसे बुरे दिनों में से एक का सामना किया है। उन्होंने आम जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए वर्षों तक कठिन परिश्रम किया गया था, लेकिन नतीजों के बाद लोगों के 401(k) रिटायरमेंट खाते गिर गए हैं। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि जनता याद रखे कि यह गिरावट रिपब्लिकन की वजह से नहीं, बल्कि डेमोक्रेट्स की जीत के कारण आई है। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाते हुए लिखा कि घबराने की जरूरत नहीं है, जल्द ही अर्थव्यवस्था पहले से कहीं अधिक बड़ी और मजबूत बनकर उभरेगी।
क्यों दबाव में आए टेक, एआई और डिफेंस सेक्टर्स?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के बहुमत में आने से व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच कड़ा टकराव (Gridlock) देखने को मिलेगा। ट्रंप प्रशासन द्वारा तकनीकी कंपनियों और एआई डेटा सेंटर्स को दिए जा रहे अनियंत्रित समर्थन पर अब कड़े विधायी प्रतिबंध और नई रेगुलेटरी जांच का खतरा बढ़ गया है। इसी आशंका के चलते एनवीडिया (Nvidia), माइक्रोन और मार्वेल जैसी दिग्गज चिपमेकर कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा विदेश नीति और रक्षा खर्च में संभावित कटौती या मध्य-पूर्व टकराव को कम करने के राजनीतिक दबाव के कारण लॉकहीड मार्टिन और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन जैसे प्रमुख डिफेंस स्टॉक्स भी बिकवाली की चपेट में आ गए। दूसरी तरफ, ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (DJT) और मस्क की कंपनियों के शेयरों में भी तीखी गिरावट देखी गई, क्योंकि विपक्षी सांसदों द्वारा इनके खिलाफ संसदीय जांच की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
ऊर्जा, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में दिखा उलटा ट्रेंड
राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद वित्तीय संपत्तियों में बहुत ही विरोधाभासी प्रतिक्रिया देखी गई। जहां एक तरफ टेक स्टॉक्स और ट्रेडिशनल ऑयल कंपनियों (जैसे एक्सॉन मोबिल) के शेयरों में मंदी रही, वहीं कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के दामों में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि विभाजित सरकार के चलते युद्ध संबंधी नीतियों पर दबाव बनेगा, जिससे ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आ सकती है। तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के घटने से ट्रेडिशनल वैल्यू स्टॉक्स, हेल्थकेयर और रिटेल सेक्टर को कुछ सहारा भी मिला। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक जनवरी 2027 में नई संसद औपचारिक रूप से कार्यभार नहीं संभाल लेती और राजकोषीय नीतियों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक वॉल स्ट्रीट पर राजनीतिक उठापटक का असर बना रहेगा।
भारतीय और वैश्विक बाजारों पर क्या पड़ेगा असर?
अमेरिकी बाजारों की इस हलचल का सीधा असर भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है। जहां अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली के चलते एशियाई तकनीकी कंपनियों और भारतीय आईटी इंडेक्स (Nifty IT) पर सतर्कता का माहौल बन गया है, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और कमजोर होता अमेरिकी डॉलर भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मैक्रो स्तर पर राहत लेकर आया है। वैश्विक फंड मैनेजर्स फिलहाल किसी भी बड़े नए निवेश से पहले वॉशिंगटन के राजनीतिक गतिरोध और आगामी आर्थिक नीतियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
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