
News India Live, Digital Desk: असम में सत्ता की हैट्रिक लगाने के इरादे से बीजेपी ने अपनी ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ की शुरुआत ऐतिहासिक नगरी ढेकियाजुली से की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में शुरू हुई यह यात्रा न केवल सरकारी उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाएगी, बल्कि असमिया अस्मिता (Asmita) के मुद्दे को भी धार देगी।ढेकियाजुली ही क्यों? ऐतिहासिक महत्व समझिएबीजेपी का ढेकियाजुली को चुनना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है:शहीदों की धरती: 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान, ढेकियाजुली में तिरंगा फहराने की कोशिश में 12 साल की किशोरी तिलेश्वरी बरुआ सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इसे असम का सबसे बड़ा ‘शहीद नगर’ माना जाता है।सांस्कृतिक प्रतीक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पूर्व में ढेकियाजुली का दौरा कर यहाँ के शहीदों को नमन किया था। बीजेपी यहाँ से ‘राष्ट्रवाद’ और ‘असमिया गौरव’ का संदेश पूरे राज्य में भेजना चाहती है।राजनीतिक समीकरण: सोनितपुर जिले का यह क्षेत्र चाय बागान श्रमिकों और विभिन्न समुदायों का मिश्रण है, जो असम चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।जन आशीर्वाद यात्रा के मुख्य उद्देश्यसरकार का रिपोर्ट कार्ड: पिछले 10 वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों (जैसे सड़कों का जाल, पुल और ओरोनोडोई योजना) को सीधे जनता तक ले जाना।विपक्ष पर प्रहार: कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के गठबंधन को विकास विरोधी बताकर घेरना।संगठनात्मक मजबूती: बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं में जोश भरना और 2026 के लिए ‘मिशन 100+’ के लक्ष्य को साधने की कोशिश।मुख्यमंत्री का संबोधन: विकास और सुरक्षा पर जोरयात्रा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ढेकियाजुली की पवित्र मिट्टी हमें संघर्ष और विजय की प्रेरणा देती है। उन्होंने असम की बदलती तस्वीर, शांति समझौतों और घुसपैठ पर लगाम लगाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया।क्यों अहम है यह यात्रा?असम में 2026 के चुनाव इस मायने में खास हैं कि यहाँ परिसीमन (Delimitation) के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के जरिए नए समीकरणों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।
UK News
