
पूर्वोत्तर राज्य असम में मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह और चिंताजनक बनी हुई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और लगातार हो रहे भूस्खलन (Landslides) के कारण जान गंवाने वाले लोगों का कुल आंकड़ा बढ़कर 101 तक पहुंच गया है। राज्य के 10 से अधिक जिलों में करीब 1.26 लाख से ज्यादा लोग इस प्राकृतिक आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं और हजारों हेक्टेयर में फैली खड़ी फसलें पानी में डूबकर तबाह हो गई हैं।
ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर, काछाड़ और करीमगंज सबसे ज्यादा प्रभावित
असम की जीवनदायिनी कही जाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी अपने पूरे उफान पर है और गुवाहाटी, धुबरी तथा जोरहाट (नेमतीघाट) में कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा बराक (Barak), दिसांग, कोपिली और सुबनसिरी जैसी प्रमुख सहायक नदियां भी उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी तेजी से भर रहा है। राज्य का कछार (Cachar), करीमगंज (Karimganj), धुबरी (Dhubri), कछार और दरांग जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई कस्बों और गांवों का जिला मुख्यालयों से सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है, जिससे लोग छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
राहत-बचाव कार्य तेज, हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर
आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें दिन-रात राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक हजारों लोगों को मोटर बोट्स की मदद से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन द्वारा प्रभावित जिलों में 100 से अधिक राहत शिविर (Relief Camps) और राहत वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 15,000 से अधिक बेघर लोग शरण लिए हुए हैं। राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, पीने का पानी, बेबी फूड, तिरपाल और आवश्यक दवाइयां वितरित की जा रही हैं।
काजीरंगा नेशनल पार्क और पशुधन पर भी भारी आफत
मानवीय तबाही के साथ-साथ इस बाढ़ ने वन्यजीवों और पशुधन पर भी भारी कहर बरपाया है। विश्व प्रसिद्ध काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है, जिससे गैंडों, हिरणों और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित ऊंचे इलाकों (हााइलैंड्स) की ओर पलायन करना पड़ रहा है। पार्क अधिकारियों के अनुसार, पानी में डूबने और राष्ट्रीय राजमार्ग पार करते समय वाहनों की चपेट में आने से कई दुर्लभ जीवों की मौत भी दर्ज की गई है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में लगभग 80,000 से अधिक मवेशी और पालतू जानवर इस भीषण बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
मौसम विभाग का अनुमान और आगे की चुनौती
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने असम और पूर्वोत्तर के पड़ोसी राज्यों के लिए अगले 48 घंटों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया है, जिससे बाढ़ की स्थिति में तुरंत सुधार होने के आसार कम नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सभी जिला आयुक्तों (DCs) को स्थिति पर 24 घंटे नजर रखने और प्रभावित लोगों तक त्वरित सहायता पहुंचाने का कड़ा निर्देश दिया है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महामारी और जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) को फैलने से रोकने के लिए मेडिकल कैंप लगाने और क्लोरीन की गोलियां बांटने के आदेश दिए हैं।
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