News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले मतदाता सूची में नामों के काटे जाने (Deletion) को लेकर मचे घमासान के बीच देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे आज ही उन अपीलीय ट्रिब्यूनलों (Appellate Tribunals) के कामकाज पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें, जिन्हें मतदाता सूची से हटाए गए नामों की अपील सुनने के लिए बनाया गया था।1. आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट को करना पड़ा हस्तक्षेप?वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष यह मामला उठाया।गंभीर आरोप: याचिका में आरोप लगाया गया कि कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा गठित किए गए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल ‘काम नहीं कर रहे हैं’।वोटिंग का अधिकार खतरे में: अगर ये ट्रिब्यूनल समय पर फैसला नहीं देते हैं, तो लाखों मतदाता चुनाव में वोट डालने से वंचित रह जाएंगे, क्योंकि 21 और 27 अप्रैल को कई चरणों के लिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया बंद हो जाएगी।2. “हम चुनावी धूल और गुस्से में अंधे नहीं हो सकते”सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:सत्य की जीत: “हम आने वाले चुनाव की आंधी, उसकी धूल और गुस्से में अंधे नहीं हो सकते। वोट देने का अधिकार केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अधिकार भी है।”अनुच्छेद 142 का उपयोग: सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों (Article 142) का इस्तेमाल करते हुए चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि यदि ट्रिब्यूनल 21 या 27 अप्रैल तक अपील स्वीकार करते हैं, तो आयोग को तुरंत ‘सप्लीमेंट्री इलेक्टोरल रोल’ जारी कर उन मतदाताओं को शामिल करना होगा।3. क्या है SIR विवाद का पूरा गणित?पश्चिम बंगाल में चल रहे इस संशोधन (SIR) के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:90 लाख नाम हटाए गए: राज्यभर में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम संदिग्ध मानकर सूची से हटाए गए हैं।34 लाख अपील लंबित: इनमें से लगभग 34 लाख लोगों ने ट्रिब्यूनल में अपील की है।न्यायिक अधिकारियों पर हमले: इससे पहले मालदा जैसे जिलों में SIR प्रक्रिया में लगे जजों को बंधक बनाने और उन पर हमले की खबरें भी सामने आई थीं, जिस पर कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी।4. अब क्या होगा अगला कदम?आज शाम तक रिपोर्ट: कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को आज ही बताना होगा कि ट्रिब्यूनल क्यों सक्रिय नहीं हैं और कितनी अपीलों का निपटारा हुआ है।24 अप्रैल को अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अब 24 अप्रैल को दोबारा सुनवाई करेगा, जहाँ तय होगा कि क्या बंगाल चुनाव की तारीखों या मतदाता सूची की अंतिम तिथि में कोई बदलाव की जरूरत है।
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