
News India Live, Digital Desk : दो साल के लंबे इंतजार के बाद हुए भिवंडी महापौर चुनाव में शुक्रवार को अप्रत्याशित परिणाम आए। भाजपा ने अंत समय में नारायण चौधरी का नाम काटकर स्नेहा पाटिल को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था, जिससे नाराज होकर चौधरी ने पाला बदल लिया।1. चुनावी नतीजों का गणित (Voting Breakdown)90 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 46 वोटों की आवश्यकता थी:उम्मीदवारपार्टी/गठबंधनप्राप्त वोटपरिणामनारायण चौधरीभाजपा (बागी) + कांग्रेस + NCP-SP48विजयीविलास पाटीलकोणार्क विकास अघाड़ी + शिवसेना (शिंदे)25पराजितस्नेहा पाटिलभाजपा (आधिकारिक उम्मीदवार)16तीसरे स्थान पर2. कैसे बदला समीकरण?भाजपा में फूट: भाजपा के पास कुल 22 नगरसेवक थे, लेकिन नारायण चौधरी के साथ करीब 8 नगरसेवकों ने क्रॉस-वोटिंग की और पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया।कांग्रेस का समर्थन: कांग्रेस (30 सीटें) और शरद पवार की एनसीपी (12 सीटें) ने अपने उम्मीदवार उतारने के बजाय भाजपा को हराने के लिए बागी नारायण चौधरी को अपना समर्थन दे दिया।उप-महापौर: कांग्रेस के तारिक मोमिन को नया उप-महापौर चुना गया है।3. भाजपा की प्रतिक्रिया: कार्रवाई के संकेतभाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इस हार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है:व्हिप का उल्लंघन: उन्होंने कहा कि जिन नगरसेवकों ने पार्टी के आदेश के खिलाफ जाकर वोट किया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता रद्द करने के लिए कोंकण मंडल आयुक्त के पास याचिका दायर की जाएगी।बयान: चव्हाण ने स्वीकार किया कि चौधरी पार्टी की पहली पसंद थे, लेकिन अंदरूनी खींचतान को देखते हुए अंत में उम्मीदवार बदलना पड़ा, जो उल्टा पड़ गया।4. भिवंडी का नया राजनीतिक परिदृश्यइस जीत के साथ भिवंडी में ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ (BSF) का शासन स्थापित हो गया है। नारायण चौधरी ने जीत के बाद कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य राजनीति से ऊपर उठकर शहर का विकास करना है। हालांकि, भाजपा द्वारा की जाने वाली कानूनी कार्रवाई उनके पद की स्थिरता के लिए भविष्य में चुनौती बन सकती है।
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