
News India Live, Digital Desk: बाबा केदारनाथ के कपाट आज यानी 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8:00 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। केदारनाथ धाम की महिमा केवल मुख्य ज्योतिर्लिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर के आसपास स्थित दिव्य कुंड भी भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं ‘उदक कुंड’ और ‘अमृत कुंड’। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन कुंडों के जल में ऐसी शक्ति है जो मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिला सकती है।उदक कुंड: मोक्ष का द्वारकेदारनाथ मंदिर के दक्षिण भाग में, मंदिर परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर उदक कुंड स्थित है।धार्मिक महत्व: स्कंद पुराण के अनुसार, इस कुंड का जल अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति के प्राण निकलते समय उसके मुख में इस कुंड के जल की कुछ बूंदें डाल दी जाएं, तो वह जीवात्मा सीधे शिवलोक को प्राप्त होती है और उसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता।परंपरा: श्रद्धालु इस कुंड के जल को बोतलों में भरकर अपने साथ घर ले जाते हैं। मंदिर में होने वाले विशेष अभिषेक में भी इस पवित्र जल का उपयोग किया जाता है।अमृत कुंड: रोगों से मुक्ति का स्रोतमंदिर के पास ही स्थित अमृत कुंड अपनी आरोग्य शक्तियों के लिए विख्यात है।दैवीय गुण: कहा जाता है कि इस कुंड के जल के छींटें मात्र से शरीर के असाध्य रोग और दोष दूर हो जाते हैं।साधना का केंद्र: प्राचीन काल में ऋषि-मुनि इस कुंड के जल का सेवन कर वर्षों तक तपस्या किया करते थे। इसे ‘देवताओं का पेय’ भी कहा जाता है क्योंकि मान्यता है कि इसमें दिव्य अमृत का अंश समाहित है।रेतस और हंस कुंड का रहस्यइन दो प्रमुख कुंडों के अलावा केदारनाथ में कुछ अन्य रहस्यमयी कुंड भी हैं:रेतस कुंड: यह कुंड अपनी अद्भुत घटना के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि यहाँ ‘ओम नमः शिवाय’ बोलने पर जल में अपने आप बुलबुले उठने लगते हैं। मान्यता है कि यह स्थान कामदेव के भस्म होने के बाद देवी रति के आंसुओं से बना था।हंस कुंड: यहाँ पितरों का तर्पण और अस्थि विसर्जन का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि यहाँ ब्रह्मा जी ने हंस का रूप धारण किया था।भक्तों के लिए जरूरी सूचना (2026 गाइडलाइंस)चार धाम यात्रा 2026 के लिए उत्तराखंड सरकार ने कुछ सख्त नियम लागू किए हैं:अनिवार्य पंजीकरण: इस वर्ष यात्रा के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। अन्य आईडी स्वीकार्य नहीं होंगी।दर्शन नियम: मंदिर परिसर के भीतर फोटो लेना या वीडियो बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही, गर्भगृह में मूर्तियों को छूने पर भी रोक है।केदारनाथ की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन कुंडों का दर्शन और आचमन यात्रा को पूर्ण और फलदायी बनाने वाला माना जाता है।
UK News