News India Live, Digital Desk: यह कहानी किसी को भी सकते में डाल सकती है. एक पढ़ा-लिखा नौजवान, जो एक काबिल डॉक्टर था, जिसका काम लोगों के दुख-दर्द दूर करना था, वो आखिर कैसे आतंक के रास्ते पर इतना आगे निकल गया कि दर्जनों लोगों की मौत का जिम्मेदार बन गया? यह कहानी है कश्मीर के सोपोर के रहने वाले डॉक्टर उमर-उन-नबी की, जिसकी पहचान अब दिल्ली को दहलाने वाले संदिग्ध आत्मघाती हमलावर के रूप में हो रही है.
हाल ही में दिल्ली के लाल किले के पास एक कार में हुए जबरदस्त बम धमाके ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इस धमाके में कई बेकसूर लोगों की जान चली गई. जब सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले की जांच शुरू की, तो जो नाम सामने आया, उसने सबके होश उड़ा दिए. यह नाम था 35 साल के डॉक्टर उमर-उन-नबी का.
कौन था यह डॉक्टर?
उमर पुलवामा का रहने वाला एक क्वालिफाइड डॉक्टर था. उसने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद उसने अनंतनाग से लेकर फरीदाबाद तक के अस्पतालों में नौकरी की. हाल ही में वह फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहा था. उसके जानने वाले, परिवार और दोस्त उसे एक शर्मीला और कम बोलने वाला इंसान बताते हैं, जो सिर्फ अपने काम और पढ़ाई में लगा रहता था. उसकी सगाई भी हो चुकी थी और जल्द ही शादी होने वाली थी.
तो फिर, वह आतंकी कैसे बन गया?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, उमर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक बेहद खतरनाक मॉड्यूल का हिस्सा था. हैरानी की बात यह है कि इस मॉड्यूल में उमर जैसे कई पढ़े-लिखे नौजवान, खासकर डॉक्टर्स शामिल थे. ये लोग अपनी मेडिकल और केमिकल की जानकारी का इस्तेमाल बम और विस्फोटक बनाने के लिए कर रहे थे.
पुलिस का कहना है कि इस पूरे खेल का पर्दाफाश 9 नवंबर को फरीदाबाद के एक ठिकाने पर हुई छापेमारी के बाद हुआ. वहां से भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट समेत बम बनाने का सामान मिला. जैसे ही उमर को पता चला कि उसके साथी पकड़े जा चुके हैं, वह डर गया. सबूत मिटाने और एक बड़े हमले को अंजाम देने के इरादे से वह विस्फोटक से भरी कार लेकर दिल्ली की तरफ भाग निकला.
धमाके की वो खौफनाक शाम
एजेंसियों का मानना है कि लाल किले के पास जिस आई-20 कार में धमाका हुआ, उसे खुद डॉक्टर उमर ही चला रहा था और इस हमले में वह भी मारा गया. अब इस बात की पुष्टि के लिए उमर की मां का डीएनए सैंपल लिया गया है, ताकि कार से मिले शव के टुकड़ों से उसका मिलान किया जा सके.
परिवार को अब भी यकीन नहीं
दूसरी तरफ, उमर का परिवार इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहा है. उनकी भाभी मुजम्मिल का कहना है कि उमर ऐसा कर ही नहीं सकता, वह तो किसी से ठीक से बात भी नहीं करता था. परिवार ने बड़ी मुश्किलों से उसे पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाया था.
यह घटना हमारे समाज के सामने कई कड़वे सवाल छोड़ जाती है. आखिर वो कौन सी वजहें थीं, जिन्होंने एक काबिल डॉक्टर को इंसानियत का दुश्मन बना दिया? यह कहानी बताती है कि आतंक का जहर किस तरह पढ़े-लिखे दिमागों को भी अपनी चपेट में ले सकता है.
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