
देश के लाखों भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए एक राहत भरी और महत्वपूर्ण खबर है। सरकार ने एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS)के तहत मिलने वाले इलाज की दरों में एक बड़ा बदलाव किया है। अबECHSके पैनल वाले निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS)की नई रेट लिस्ट के हिसाब से तय होगा।स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और यहनई दरें15दिसंबर 2025से पूरे देश में लागू हो जाएंगी। इस बदलाव का सीधा फायदा लाखों पूर्व सैनिक परिवारों को मिलेगा,क्योंकि अब ओपीडी,अस्पताल में भर्ती,दवाइयां और बिल की वापसी,सब कुछ एक नई और पारदर्शी व्यवस्था के तहत होगा। कैशलेस इलाज की सुविधा पहले की तरह ही जारी रहेगी।अब शहर और अस्पताल तय करेंगे आपके इलाज का खर्चपहले देशभर में इलाज की दरें लगभग एक जैसी थीं,लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव किया गया है। अब इलाज का खर्च दो मुख्य बातों पर निर्भर करेगा:अस्पताल किस शहर में है?अस्पताल की क्वालिटी कैसी है?शहरों को तीन हिस्सों में बांटा गया:सरकार ने इलाज की दरों के लिए देश के शहरों को तीन कैटेगरी (Tier)में बांटा है:Tier-1 (बड़े शहर):दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे बड़े शहरों में इलाज का पूरा यानी100%रेट मिलेगा।Tier-2 (मध्यम शहर):इन शहरों में बड़े शहरों के मुकाबले10%कम रेट पर भुगतान होगा।(पूर्वोत्तर के राज्य,जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भी इसी कैटेगरी में रखा गया है।)Tier-3 (छोटे शहर):यहां बड़े शहरों की तुलना में20%कम रेट पर भुगतान होगा।इसका मतलब है कि अब दिल्ली में इलाज का जो खर्च आएगा,वह गुवाहाटी या किसी छोटे शहर से अलग होगा।वार्ड के हिसाब से भी बदलेगा बिलइलाज के दाम अब इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि मरीज को कौन-सा वार्ड मिला है।जनरल वार्ड:सामान्य रेट से5%कम।सेमी-प्राइवेट वार्ड:सामान्य (बेस) रेट।प्राइवेट वार्ड:सामान्य रेट से5%ज्यादा।अस्पताल ECHSकार्ड में दर्ज वार्ड की श्रेणी के हिसाब से ही बिल बना सकेंगे। हालांकि,ओपीडी,स्पेशल जांचें और डे-केयर जैसी सेवाओं के दाम सभी वार्ड के लिए एक जैसे ही रहेंगे।अच्छे अस्पताल को मिलेगा इनाम,कमजोर क्वालिटी वालों पर लगेगी लगामसरकार ने इलाज की क्वालिटी को बढ़ावा देने के लिए भी एक बड़ा कदम उठाया है।क्वालिटी की मान्यता प्राप्त अस्पताल (Accredited):इन्हें15%ज्यादापैसे मिलेंगे।बिना मान्यता वाले अस्पताल:इन्हें तय रेट से15%कमभुगतान किया जाएगा।यह बदलाव इसलिए भी जरूरी था ताकि पूरी व्यवस्था को और पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सके। अब हर मरीज और अस्पताल को यह साफ-साफ पता होगा कि किस शहर में,किस वार्ड में और किस तरह के इलाज का कितना खर्च तय है,जिससे इलाज करवाना और भी आसान हो जाएगा।
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