
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) देश के करोड़ों नौकरीपेशा (Salaried) लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे भरोसेमंद और बड़ा जरिया है। इस फंड में कर्मचारी की बेसिक सैलरी का एक हिस्सा और उतना ही योगदान नियोक्ता (Company) की तरफ से जमा होता है, जिस पर सरकार हर साल आकर्षक ब्याज भी देती है। हाल ही में 'EPFO 3.0' के अपग्रेडेशन और डिजिटल सेवाओं में सुधार की चर्चाओं के बीच, कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे अपनी किसी भी जरूरत पर जब चाहें अपने पीएफ खाते का 100 फीसदी (पूरा) पैसा निकाल सकते हैं?
इसका सीधा और साफ जवाब है—'बिल्कुल नहीं'। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सख्त नियमों के मुताबिक, नौकरी में रहते हुए आपको अपने पीएफ खाते से पूरी रकम निकालने की अनुमति कतई नहीं दी जाती है। 100% निकासी केवल कुछ बेहद विशेष और अनिवार्य परिस्थितियों में ही संभव है।
इन 2 खास परिस्थितियों में ही निकाल सकते हैं पीएफ का पूरा पैसा
मौजूदा ईपीएफओ गाइडलाइंस के अनुसार, कोई भी खाताधारक अपने पीएफ का शत-प्रतिशत पैसा केवल नीचे दी गई स्थितियों में ही निकाल (Final Settlement) सकता है:
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रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने पर: जब कर्मचारी अपनी नौकरी के बाद 58 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तो वह अपने ईपीएफ खाते में जमा पूरी राशि (कर्मचारी + नियोक्ता का हिस्सा + ब्याज) निकालने के लिए पूरी तरह पात्र हो जाता है।
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नौकरी छूटने या बेरोजगारी की स्थिति में: यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है और वह बेरोजगार हो जाता है, तो वह पूरा फंड निकाल सकता है। हालांकि, इसके लिए भी एक समय सीमा तय है।
बेरोजगारी के दौरान पैसे निकालने का क्या है '75:25' का फॉर्मूला?
नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारियों को तुरंत वित्तीय संकट से बचाने के लिए ईपीएफओ ने एक विशेष व्यवस्था की है। नियमों के मुताबिक:
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1 महीना बेरोजगार रहने पर: नौकरी छूटने के ठीक एक महीने बाद (30 दिन पूरे होने पर) कर्मचारी अपनी कुल पीएफ राशि का अधिकतम 75 फीसदी हिस्सा एडवांस के रूप में निकाल सकता है।
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2 महीने बेरोजगार रहने पर: यदि कर्मचारी को लगातार दो महीने (60 दिन) या उससे अधिक समय तक कोई नई नौकरी नहीं मिलती है, तो वह अपने खाते में बची हुई शेष 25 फीसदी राशि को भी निकालकर अपना फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कर सकता है।
नई नौकरी मिलते ही पीएफ निकालना घाटे का सौदा, ट्रांसफर करना है बेस्ट
अक्सर देखा जाता है कि कई कर्मचारी कंपनी बदलते ही अपनी पुरानी पीएफ राशि को सीधे बैंक खाते में निकाल लेते हैं। ईपीएफओ और वित्तीय विशेषज्ञ ऐसा करने की सख्त मनाही करते हैं। संगठन का कहना है कि नौकरी बदलने पर आपको अपनी पुरानी पीएफ राशि को अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की मदद से नई कंपनी के पीएफ खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर (Transfer) कर लेना चाहिए।
ऐसा करने से आपके पीएफ खाते पर मिलने वाले चक्रवर्धि ब्याज (Compounding Interest) का क्रम नहीं टूटता, आपकी कुल सर्विस हिस्ट्री (सेवा अवधि) लगातार जुड़ी रहती है (जो आगे चलकर पेंशन के लिए जरूरी है) और रिटायरमेंट तक एक बहुत बड़ा फंड तैयार हो जाता है। बार-बार पीएफ का पैसा निकालने से आपका भविष्य असुरक्षित होता है और यदि सेवा अवधि 5 साल से कम है तो निकाली गई रकम पर भारी टैक्स भी देना पड़ सकता है।
एमरॉन्सी में काम आएगी 'आंशिक निकासी' (PF Advance) की सुविधा
भले ही नौकरी के दौरान आपको 100% रकम निकालने की इजाजत न हो, लेकिन ईपीएफओ अपने सदस्यों को जीवन की कुछ महत्वपूर्ण और आपातकालीन जरूरतों के लिए आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) यानी पीएफ एडवांस की बेहतरीन सुविधा देता है। आप नीचे दिए गए कार्यों के लिए अपने पीएफ खाते से एक निश्चित सीमा तक पैसा निकाल सकते हैं:
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स्वयं या बच्चों की उच्च शिक्षा (Higher Education) और शादी के लिए।
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नया घर खरीदने, प्लॉट लेने या मकान बनवाने के लिए।
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होम लोन (Home Loan) की बची हुई ईएमआई को चुकाने के लिए।
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परिवार में किसी गंभीर बीमारी के इलाज (Medical Emergency) के लिए।
ध्यान रहे कि हर एक जरूरत के लिए पीएफ से पैसे निकालने की पात्रता, नौकरी की न्यूनतम समय सीमा और निकासी की अधिकतम लिमिट अलग-अलग तय की गई है।
फाइनल सेटलमेंट से पहले जरूर करें सोच-विचार
फाइनेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईपीएफ को महज एक सेविंग अकाउंट की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह आपके बुढ़ापे की लाठी है। इसमें आपके और कंपनी के योगदान के साथ-साथ सालाना मिलने वाला सरकारी ब्याज आपके फंड को तेजी से बढ़ाता है। इसलिए जब तक कोई बेहद गंभीर संकट न हो, पीएफ के पूरे पैसे को निकालने के बजाय उसे खाते में ही बरकरार रहने दें, ताकि रिटायरमेंट के बाद आपकी आर्थिक आजादी और सुरक्षा पूरी मजबूती के साथ बनी रहे।
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