_2003336919.jpg)
News India Live, Digital Desk: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय गलियारों में एक खबर जंगल की आग की तरह फैल रही है कि अमेरिका, भारत की धरती का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए कर रहा है। दावा किया जा रहा है कि भारत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और यहीं से ईरान के खिलाफ ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थिति स्पष्ट की है।सोशल मीडिया पर वायरल दावों की हकीकतइंटरनेट पर चल रही कई अपुष्ट रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया था कि भारत ने अमेरिका को अपने सैन्य हवाई अड्डों तक पहुंच प्रदान की है, जिनका उपयोग ईरान की सीमा के पास रणनीतिक ऑपरेशनों के लिए किया जा रहा है। इन दावों ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, बल्कि भारत-ईरान के पुराने रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन दावों को पूरी तरह से ‘तथ्यहीन’ और ‘भ्रामक’ करार दिया है।LEMOA समझौते का गलत इस्तेमाल और स्पष्टीकरणअक्सर चर्चा में रहने वाले भारत-अमेरिका के ‘लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (LEMOA) का हवाला देकर इन अफवाहों को हवा दी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि इस समझौते का मतलब कतई यह नहीं है कि भारत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने बनाए गए हैं। LEMOA केवल दोनों देशों की सेनाओं को मरम्मत और रसद (Supplies) के लिए एक-दूसरे की सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देता है, न कि किसी देश के खिलाफ युद्ध के लिए अड्डों की स्थापना की।भारत की दोटूक: ‘हमारी जमीन पर कोई विदेशी सैन्य बेस नहीं’भारत सरकार ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत की संप्रभुता सर्वोपरि है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में दोहराया कि भारत में किसी भी विदेशी देश का कोई सैन्य अड्डा नहीं है। भारत हमेशा से ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) की नीति पर चलता रहा है और किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष में अपनी जमीन का इस्तेमाल युद्ध के लिए करने की अनुमति नहीं देता।ईरान के साथ संबंधों पर नहीं पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फर्जी खबरें भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंधों में दरार डालने की कोशिश हो सकती हैं। चाबहार बंदरगाह और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ईरान भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। विदेश मंत्रालय के इस समय पर आए स्पष्टीकरण ने उन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है जो मध्य पूर्व की अशांति में भारत की भागीदारी की झूठी तस्वीर पेश कर रहे थे।
UK News