
News India Live, Digital Desk: फाल्गुन मास का आखिरी प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि इसके ठीक बाद होली का त्यौहार और फिर हिंदू नववर्ष (चैत्र मास) की शुरुआत होती है।1. तिथि और समय (Important Timings)त्रयोदशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय को लेकर छात्रों और श्रद्धालुओं में असमंजस हो सकता है, लेकिन प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद के ‘प्रदोष काल’ में की जाती है:त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी 2026 (शनिवार) को रात 08:43 बजे से।त्रयोदशी तिथि समाप्त: 01 मार्च 2026 (रविवार) को शाम 07:09 बजे तक।व्रत की तारीख: 1 मार्च 2026 (रविवार)।2. पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)प्रदोष व्रत में महादेव की पूजा का सबसे फलदायी समय प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) माना जाता है:प्रदोष काल पूजा समय: शाम 06:21 बजे से शाम 07:09 बजे तक।कुल अवधि: 48 मिनट।निशिता मुहूर्त (रात्रि पूजा): रात 12:08 बजे से 12:58 बजे तक।3. दुर्लभ शुभ संयोग (Special Yog)इस साल का आखिरी फाल्गुन प्रदोष कई दुर्लभ योगों के साथ आ रहा है, जो इसे और भी मंगलकारी बनाते हैं:सर्वार्थ सिद्धि योग: इस योग में शुरू किया गया कोई भी कार्य सफल होता है।रवि पुष्य योग: इसे खरीदारी और नई शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र माना जाता है।आयुष्मान योग: यह दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देता है।4. रवि प्रदोष व्रत का महत्वशास्त्रों के अनुसार, रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ति होती है। यह व्रत कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने और मान-सम्मान में वृद्धि के लिए भी उत्तम माना गया है।5. पूजा विधि संक्षेप मेंसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।पूरे दिन निराहार या फलाहार रहें।शाम को सूर्यास्त से पहले दोबारा स्नान कर साफ वस्त्र पहनें।भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन अर्पित करें।प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
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