
News India Live, Digital Desk: पिछले 11 सालों से एक ही करवट पर लेटे और जिंदगी व मौत के बीच झूल रहे 36 वर्षीय हरीश राणा की किस्मत का फैसला आज हो सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद, आज AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) का एक विशेष मेडिकल बोर्ड बैठक करेगा। इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि क्या हरीश को ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (Passive Euthanasia) यानी ‘सम्मानजनक मृत्यु’ दी जा सकती है या नहीं।क्या है हरीश राणा की दास्तां? साल 2013 में एक दर्दनाक हादसे ने हरीश की जिंदगी बदल दी थी। चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद वह पूरी तरह से बेडरिडन (Bedridden) हो गए। पिछले एक दशक से उनके माता-पिता, जो अब बुजुर्ग हो चुके हैं, उनकी देखभाल कर रहे हैं। हरीश न तो बोल सकते हैं, न चल सकते हैं और पूरी तरह से लाइफ सपोर्ट और दूसरों पर निर्भर हैं।कोर्ट में माता-पिता की गुहार: ‘हमें जीते जी मुक्ति दे दो’ हरीश के माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए भावुक अपील की थी। उन्होंने कहा कि उनके पास अब न तो आर्थिक संसाधन बचे हैं और न ही शारीरिक क्षमता कि वे अपने बेटे को तड़पते हुए देख सकें। याचिका में मांग की गई है कि हरीश का ‘नेत्र फीडिंग ट्यूब’ (Feeding Tube) हटा दिया जाए ताकि उन्हें इस अंतहीन पीड़ा से मुक्ति मिल सके।AIIMS बोर्ड की भूमिका और कानूनी पेचीदगियां सुप्रीम कोर्ट के 2018 के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, भारत में ‘पैसिव यूथेनेशिया’ की अनुमति है, लेकिन इसके लिए बेहद कड़े नियम हैं। आज AIIMS के डॉक्टर हरीश की शारीरिक और मानसिक स्थिति की जांच करेंगे और अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेंगे। यह रिपोर्ट तय करेगी कि हरीश को ‘राइट टू डाई विद डिग्निटी’ (सम्मान के साथ मरने का अधिकार) मिलेगा या उनकी जंग जारी रहेगी।
UK News
