
News India Live, Digital Desk: डॉक्टर’ एक ऐसा शब्द है जिस पर हम आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके इलाज करने वाले हर व्यक्ति को अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ (Dr.) लिखने का कानूनी अधिकार नहीं है? इसी कन्फ्यूजन को खत्म करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि कौन अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ शब्द का इस्तेमाल कर सकता है और किसे ऐसा करने से पहले अपनी पूरी योग्यता बतानी होगी.यह फैसला उन लाखों मरीजों के लिए एक बड़ी राहत है, जो अक्सर यह नहीं समझ पाते कि उनका इलाज करने वाला डॉक्टर एलोपैथी का है या किसी और चिकित्सा पद्धति का.हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?मद्रास हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया किसिर्फ वही डॉक्टर अपने नाम के आगे बिना किसी शर्त के ‘डॉक्टर’ (Dr.) प्रीफिक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आधुनिक चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) में रजिस्टर्ड हैं.इसका सीधा मतलब है कि केवलMBBS, MS, MD जैसी डिग्री वाले डॉक्टर, जोराष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अधिनियम (पहले भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956) के तहत पंजीकृत हैं, ही सही मायनों में ‘डॉक्टर’ शब्द का इस्तेमाल करने के हकदार हैं.तो फिर फिजियोथेरेपिस्ट, आयुर्वेद और होम्योपैथी डॉक्टरों का क्या?यही इस फैसले का सबसे अहम हिस्सा है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रैक्टिशनर्स अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ शब्द का इस्तेमाल तो कर सकते हैं, लेकिनउन्हें साथ में ब्रैकेट में अपनी चिकित्सा पद्धति का पूरा नाम लिखना अनिवार्य होगा.इस फैसले के दायरे में आने वाले प्रोफेशनल्स हैं:फिजियोथेरेपिस्ट (Physiotherapists)आयुर्वेदिक डॉक्टर (BAMS)होम्योपैथिक डॉक्टर (BHMS)सिद्धा डॉक्टर (BSMS)यूनानी डॉक्टर (BUMS)उदाहरण के लिए: अगर कोई फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखता है, तो उसेडॉ. [नाम] (फिजियोथेरेपिस्ट) लिखना होगा. इसी तरह, एक आयुर्वेदिक डॉक्टर कोडॉ. [नाम] (आयुर्वेद) लिखना होगा.क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत?हाईकोर्ट ने यह फैसला मरीजों की सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए सुनाया. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा:”जब कोई व्यक्ति अपने नाम के आगे सिर्फ ‘डॉक्टर’ लिखता है, तो आम जनता यह मान लेती है कि वह एक MBBS डॉक्टर है. यह स्थिति मरीजों के लिए भ्रामक और खतरनाक हो सकती है, खासकर इमरजेंसी के समय. मरीजों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनका इलाज किस चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ द्वारा किया जा रहा है.”यह फैसला यह सुनिश्चित करेगा कि मरीज इलाज शुरू होने से पहले ही अपने डॉक्टर की योग्यता और चिकित्सा पद्धति के बारे में स्पष्ट जानकारी रखें और सोच-समझकर फैसला लें.
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