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मुंबई में दिनदहाड़े 1500 बच्चे बंधक स्कूल बचाने की जंग में बच्चों को बनाया ढाल, सड़क पर मचा हड़कंप

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News India Live, Digital Desk : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई गुरुवार को एक ऐसे अभूतपूर्व और हैरान कर देने वाले प्रदर्शन की गवाह बनी, जिसने हर देखने वाले को सोचने पर मजबूर कर दिया। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के पास, लगभग 1520 स्कूली बच्चों को बीच सड़क पर बैठा दिया गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और ट्रैफिक का चक्का जाम हो गया। यह बच्चे किसी अपराधी के चंगुल में नहीं, बल्कि अपने ही माता-पिता और एक एनजीओ के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे, जिन्होंने एक तरह से इन बच्चों को ‘बंधक’ बनाकर अपनी मांगों को मनवाने की कोशिश की।

क्यों हो रहा है यह विरोध प्रदर्शन?

यह पूरा मामला बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की नई ‘क्लस्टर स्कूल’ नीति से जुड़ा है। इस नीति के तहत, बीएमसी अपने द्वारा चलाए जा रहे 1441 स्कूलों का विलय करने की योजना बना रही है, यानी कई छोटे-छोटे स्कूलों को बंद करके कुछ बड़े स्कूलों में मिला दिया जाएगा।

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का आरोप है कि इस फैसले से उनके बच्चों के घर के पास वाले स्कूल बंद हो जाएंगे। इससे उन्हें अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बहुत दूर भेजना पड़ेगा, जो गरीब और मजदूर वर्ग के परिवारों के लिए न केवल महंगा होगा, बल्कि असुरक्षित भी होगा। इन्हीं चिंताओं को लेकर अभिभावकों ने एक एनजीओ के साथ मिलकर यह प्रदर्शन आयोजित किया।

बच्चों को बनाया ढाल, सड़कों पर मचा कोहराम

गुरुवार को दिनदहाड़े, प्रदर्शनकारी अभिभावक और एनजीओ के सदस्य 1500 से ज्यादा बच्चों को लेकर सीएसएमटी के पास पहुंच गए और उन्हें सड़क पर मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाकर बैठा दिया। बच्चों के सड़क पर बैठने से कुछ ही मिनटों में दक्षिणी मुंबई को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लग गईं। ऑफिस आने-जाने वाले हजारों लोग इस जाम में घंटों फंसे रहे।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

जैसे ही इस विशाल प्रदर्शन की खबर पुलिस को मिली, तुरंत भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने पहले तो आयोजकों से बातचीत करके बच्चों को सड़क से हटाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने, तो पुलिस को हल्की सख्ती दिखानी पड़ी। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और बड़ी मुश्किल से बच्चों को सड़क से हटाकर ट्रैफिक को सामान्य कराया।

यह घटना उन हजारों गरीब बच्चों के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है जो सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। एक तरफ जहां सरकार बेहतर शिक्षा का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अभिभावकों को डर है कि कहीं इस बदलाव की कीमत उनके बच्चों को अपना स्कूल खोकर न चुकानी पड़े।

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