
News India Live, Digital Desk: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। भागवत ने स्पष्ट किया कि देश में जो बदलाव और ‘अच्छे दिन’ दिखाई दे रहे हैं, उसके पीछे केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं, बल्कि दशकों का संघर्ष और राम मंदिर आंदोलन की ऊर्जा शामिल है।”संघ के बिना संभव नहीं था यह परिवर्तन”एक हालिया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सफलता और देश के मौजूदा सकारात्मक माहौल में संघ के स्वयंसेवकों का अतुलनीय योगदान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम मंदिर आंदोलन ने देश की चेतना को जगाने का काम किया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। भागवत के अनुसार, समाज में आए इस बदलाव का श्रेय उन लाखों कार्यकर्ताओं को जाता है जिन्होंने जमीन पर रहकर काम किया।राम मंदिर आंदोलन: एक वैचारिक क्रांतिभागवत ने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि राम मंदिर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने हिंदुओं को एकजुट किया और राष्ट्रवाद की एक नई लहर पैदा की। संघ प्रमुख का मानना है कि ‘अच्छे दिन’ का आना किसी एक व्यक्ति या दल का चमत्कार नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक इच्छाशक्ति और संघ के निरंतर प्रयासों का नतीजा है।भविष्य का रोडमैप और संघ की भूमिकाराजनीतिक गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। भागवत ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार को अपनी नीतियों में जनभावनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और समाज निर्माण के कार्य में बिना रुके लगे रहें।
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