
भारतीय नौसेना के किसी नए जहाज का नाम सुनते ही आमतौर पर आंखों के सामने भारी तोपें, सुपरसोनिक ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम घूम जाते हैं। लेकिन भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी पोत आईएनएस निपुण (INS Nipun) पारंपरिक हथियारों और मिसाइलों से पूरी तरह अलग है। यह जहाज न तो किसी दुश्मन पर मिसाइलें दागेगा और न ही भारी तोपों से गोलाबारी करेगा।
इसके बावजूद, यह समंदर के सबसे अंधेरे और गहरे हिस्सों में भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी रीढ़ बनने जा रहा है। विशाखापट्टनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) द्वारा निर्मित यह भारत का पहला अत्याधुनिक स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (Diving Support Vessel – DSV) है।
डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) क्या है और आईएनएस निपुण क्या काम करेगा?
आईएनएस निपुण लगभग 118.4 मीटर लंबा और 9,350 टन से अधिक विस्थापन क्षमता (Displacement) वाला एक विशालकाय पोत है। इसे समंदर की अथाह गहराइयों में जटिल अंडरवाटर ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है।
इस जहाज का मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र में नौसेना के गोताखोरों को सुरक्षित कार्यस्थल मुहैया कराना, पनडुब्बी दुर्घटनाओं के समय रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना और पानी के नीचे छिपे खतरों को बेअसर करना है।
आईएनएस निपुण की प्रमुख जिम्मेदारियां और क्षमताएं
भले ही इस पर युद्धक मिसाइलें न हों, लेकिन इसमें लगी आधुनिक तकनीकें इसे समंदर का सबसे शक्तिशाली रेस्क्यू पोत बनाती हैं:
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डीप सी डाइविंग ऑपरेशंस (Deep Sea Diving): जहाज पर अत्याधुनिक सैचुरेशन डाइविंग सिस्टम और डाइविंग बेल्स लगी हैं। इनकी मदद से नौसेना के विशेष डाइवर्स समंदर की सैकड़ों मीटर गहराई में बिना किसी दबाव की बीमारी (Decompression Sickness) के कई दिनों तक रहकर अंडरवाटर काम कर सकते हैं।
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पनडुब्बी बचाव मिशन (Submarine Rescue): यदि समंदर में कोई पनडुब्बी दुर्घटनाग्रस्त होकर सतह के नीचे फंस जाती है, तो आईएनएस निपुण 'डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल' (DSRV) को तुरंत लॉन्च कर पानी के अंदर फंसी पनडुब्बी से नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में सक्षम है।
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अंडरवाटर सर्च, सर्विलांस और माइंस डिटेक्शन: इस पर रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) और आधुनिक साइड-स्कैन सोनार लगाए गए हैं। ये पानी के नीचे बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines), डूबे हुए जहाजों या विमानों के मलबे और महत्वपूर्ण संचार केबलों की सटीक निगरानी कर सकते हैं।
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हेलीकॉप्टर और मेडिकल डेक: जहाज पर आपातकालीन चिकित्सा के लिए हाइपरबेरिक चैंबर (Hyperbaric Chamber) और सी-किंग या एमएच-60आर जैसे नौसैनिक हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए विस्तृत हेली-डेक मौजूद है।
भारतीय नौसेना को इस खास जहाज की जरूरत क्यों पड़ी?
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की समुद्री सीमाएं 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी हैं और यहां दुनिया का सबसे व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्ग गुजरता है। इस क्षेत्र में चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती आवाजाही और जटिल अंडरवाटर गतिविधियों के बीच भारत को अपने पानी के नीचे के बुनियादी ढांचे (Underwater Critical Infrastructure) की सुरक्षा के लिए एक समर्पित पोत की सख्त जरूरत थी।
पहले भारतीय नौसेना को गहरे समुद्र में बड़े बचाव और डाइविंग मिशनों के लिए पुराने जहाजों या विदेशी सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता था। आईएनएस निपुण और इसके सिस्टर शिप 'आईएनएस निस्तार' के शामिल होने से भारत अब गहरे पानी में स्वतंत्र रूप से सर्च, रेस्क्यू और स्पेशल अंडरवाटर कमांडो ऑपरेशंस चलाने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है।
'आत्मनिर्भर भारत' का समंदर में बड़ा प्रतीक
आईएनएस निपुण में लगभग 80 प्रतिशत से अधिक उपकरण और सामग्री पूर्णतः स्वदेशी हैं। यह जहाज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि युद्ध केवल तोप और बारूद से नहीं जीते जाते, बल्कि समंदर की गहराइयों में तकनीकी महारत, जीवन रक्षा और सामरिक निगरानी भी देश की समुद्री सुरक्षा के लिए उतनी ही अनिवार्य है।
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