
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्रा के दौरान एक बार फिर से योग की वैश्विक ताकत और उसकी लोकप्रियता का डंका पूरी दुनिया के सामने बजा दिया है. अपनी कूटनीतिक व्यस्तताओं के बीच पीएम मोदी ने हाल ही में उज्बेकिस्तान में आयोजित एक विशेष योग सत्र का एक बेहद आकर्षक और मनमोहक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसने इंटरनेट पर आते ही धूम मचा दी है. इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही पूरी दुनिया में एक बार फिर से भारतीय संस्कृति और प्राचीन योग परंपरा की गूंज सुनाई दे रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस वीडियो को अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा है कि उज्बेकिस्तान के नागरिक और वहां के लोग योग से बेहद प्यार करते हैं और इसे अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं. भारत की यह प्राचीन विधा आज किसी एक देश की सीमा में बंधकर नहीं रह गई है, बल्कि पूरी दुनिया इसे स्वास्थ्य और मानसिक शांति के एक अचूक माध्यम के रूप में अपना रही है. मध्य एशिया के इस खूबसूरत देश में योग के प्रति लोगों का यह समर्पण और उत्साह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए एक गर्व का क्षण है, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आत्मिक रिश्तों को और अधिक मजबूत कर रहा है.
ताशकंद और समरकंद से लेकर उज्बेकिस्तान के कोने-कोने में पहुंचा योग का संदेश
जब कोई राष्ट्र प्रमुख किसी दूसरे देश की यात्रा पर जाता है, तो कूटनीति और व्यापारिक समझौतों के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी कूटनीति का एक बहुत बड़ा और प्रभावी हिस्सा होता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की अपनी इस यात्रा के दौरान यह साबित कर दिया है कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर पूरी दुनिया को जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम है. शेयर किए गए वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे उज्बेकिस्तान के आम नागरिकों, युवाओं और योग प्रेमियों ने बड़ी संख्या में इस विशेष सत्र में भाग लिया और पूरे उत्साह के साथ योगासन किए. ताशकंद और समरकंद जैसे ऐतिहासिक शहरों में योग के प्रति यह बढ़ता हुआ क्रेज इस बात का गवाह है कि मध्य एशियाई देशों में भारतीय संस्कृति के प्रति एक स्वाभाविक झुकाव और सम्मान का भाव मौजूद है. स्थानीय लोग योग की विभिन्न मुद्राओं, प्राणायाम और ध्यान पद्धतियों को बहुत ही अनुशासित तरीके से सीखते नजर आ रहे हैं. वहां के लोगों का यह मानना है कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ और लचीला बनाता है, बल्कि यह तनाव भरी भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति और संतुलन हासिल करने का भी सबसे बेहतरीन जरिया है. उज्बेकिस्तान सरकार और स्थानीय सांस्कृतिक संगठनों ने भी योग को बढ़ावा देने में हमेशा से सक्रिय भूमिका निभाई है, और प्रधानमंत्री मोदी के इस पोस्ट ने उस प्रयास को एक नई वैश्विक पहचान और ऊर्जा दे दी है.
पीएम मोदी के इस ग्लोबल योग संदेश से दोनों देशों के बीच मजबूत हुए सांस्कृतिक रिश्ते
भारत और उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक संबंध सदियों पुराने हैं, और मध्य एशिया के इस क्षेत्र के साथ भारत के व्यापारिक तथा सांस्कृतिक जुड़ाव का एक गौरवशाली अतीत रहा है. आधुनिक दौर में कूटनीति केवल राजनीति और रक्षा करारों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जन-से-जन के संपर्क (People-to-People Contact) और सांस्कृतिक साझीदारी पर इसका सबसे ज्यादा जोर रहता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग सत्र का यह वीडियो साझा करना इसी रणनीति का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दोनों देशों की जनता को भावनात्मक रूप से एक-दूसरे के और करीब लाता है. जब एक देश का शीर्ष नेता दूसरे देश की जनता को अपनी संस्कृति से इस तरह से जुड़ा हुआ पाता है, तो आपसी कूटनीतिक संबंध और अधिक प्रगाढ़ हो जाते हैं. उज्बेकिस्तान में योग शिक्षकों, ट्रेनिंग संस्थानों और योग स्टूडियो की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वहां की युवा पीढ़ी पश्चिमी जीवनशैली के साथ-साथ भारतीय प्राचीन विज्ञान को भी खुले दिल से अपना रही है. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और भारतीय दूतावासों द्वारा लगातार दुनिया भर में योग शिविरों का आयोजन किया जाता रहा है, जिसका सकारात्मक असर अब मध्य एशिया के इस महत्वपूर्ण देश में साफ-साफ देखने को मिल रहा है.
संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर पूरी दुनिया में कैसे बदली योग की तस्वीर
एक दशक पहले तक योग को केवल साधु-संतों या कुछ विशेष वर्ग के लोगों तक ही सीमित माना जाता था, लेकिन साल 2014 के बाद से वैश्विक स्तर पर योग की पूरी परिभाषा और उसकी स्वीकार्यता में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) में दिए गए उस ऐतिहासिक आह्वान के बाद, जिसमें उन्होंने 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' (International Day of Yoga) के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा था, दुनिया के लगभग 170 से अधिक देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था. आज स्थिति यह है कि दुनिया का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा होगा जहाँ योग न किया जाता हो, और उज्बेकिस्तान जैसे देश इस ग्लोबल मूवमेंट में सबसे आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. योग अब किसी एक धर्म या संस्कृति का हिस्सा न रहकर पूरी मानव जाति के स्वास्थ्य और कल्याण की वैश्विक धरोहर बन चुका है. उज्बेकिस्तान में आयोजित इस योग सत्र का वीडियो इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे योग सरहदों, भाषाओं और संस्कृतियों की दीवारों को पार, कर पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों का भी यह मानना है कि आज की इस तनावपूर्ण और डिजिटल दुनिया में योग मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक वरदान साबित हो रहा है, और प्रधानमंत्री मोदी का यह प्रयास इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है.
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