News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच भारतीय राजनीति में भी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वे अपने ‘अमेरिकी और इजरायली दोस्तों’ को नाराज न करने के लिए ईरान के मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। हालांकि, उनकी ही पार्टी के सांसद शशि थरूर ने सरकार की इस ‘खामोशी’ को “रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट” (Responsible Statecraft) करार दिया है।1. सोनिया गांधी और कांग्रेस का कड़ा प्रहारकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी ने सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं:स्वतंत्र विदेश नीति का हनन: सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को त्याग दिया है और देश की विश्वसनीयता को खतरे में डाल दिया है।चुप्पी पर सवाल: कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या (जो फरवरी 2026 में एक हमले में हुई) पर आधिकारिक निंदा क्यों नहीं की?संसद में वॉकआउट: हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान को ‘सारहीन’ (Vapid) बताते हुए विपक्षी दलों ने संसद से वॉकआउट भी किया था।2. शशि थरूर का ‘अलग’ स्टैंड (The Tharoor Twist)पार्टी लाइन से हटकर शशि थरूर ने सरकार के ‘सतर्क रुख’ का बचाव किया है:राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: थरूर का तर्क है कि खाड़ी देशों में भारत के 90 लाख नागरिक रहते हैं और हमारी ऊर्जा सुरक्षा (LPG/LNG आयात) उन्हीं देशों पर निर्भर है। ऐसे में किसी एक पक्ष की निंदा करना रणनीतिक रूप से गलत हो सकता है।नेहरूवादी मिसाल: थरूर ने जवाहरलाल नेहरू का उदाहरण देते हुए कहा कि गुटनिरपेक्षता का मतलब केवल नैतिक स्टैंड लेना नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना भी है।सिर्फ शोक व्यक्त करना काफी: थरूर ने माना कि भारत को खामेनेई की मौत पर तुरंत सार्वजनिक शोक (Condolence) व्यक्त करना चाहिए था, जैसा कि पूर्व राष्ट्रपति रायसी की मृत्यु पर किया गया था, लेकिन युद्ध की निंदा न करना ‘डर’ नहीं बल्कि ‘सावधानी’ है।3. भाजपा का पलटवारभाजपा ने इस अंदरूनी कलह पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस अब पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है। केंद्रीय मंत्रियों का कहना है कि भारत ‘शांति का दूत’ बनकर दोनों पक्षों से बात कर रहा है और पीएम मोदी ने हाल ही में ईरान और कुवैत के नेतृत्व से फोन पर चर्चा भी की है।वर्तमान स्थिति: क्या है भारत का दांव?भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी जहाजों को अपने बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति दी है।सरकार “सॉवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी” (Sovereignty & Territorial Integrity) के सिद्धांत पर कायम है, लेकिन सीधे तौर पर किसी भी सैन्य कार्रवाई का समर्थन या विरोध करने से बच रही है।
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