News India Live, Digital Desk: देश की ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों इस्तीफों को लेकर भारी हलचल मची हुई है। हाल ही में उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफे ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। राही का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से कोई जिम्मेदारी वाला पद या सार्थक काम नहीं दिया जा रहा था। लेकिन राही के इस कदम ने एक ऐसे पुराने और हाई-प्रोफाइल मामले के जिन्न को फिर से बोतल से बाहर निकाल दिया है, जो पिछले साढ़े छह सालों से सरकारी फाइलों में दफ्न है। यह मामला है 2012 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन का, जिनका इस्तीफा आज तक मंजूर नहीं हुआ है और इसी वजह से उनका राजनीतिक करियर शुरू होने से पहले ही अधर में लटक गया है।कश्मीर मुद्दे पर दिया था इस्तीफा, 6 साल से लटकी है फाइल कन्नन गोपीनाथन वही तेजतर्रार आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने अगस्त 2019 में कश्मीर के लोगों को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न मिलने’ का हवाला देते हुए अपने पद से अचानक इस्तीफा दे कर तहलका मचा दिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 6 साल से ज्यादा का वक्त बीत जाने के बाद भी सरकार ने उनके इस्तीफे पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, गोपीनाथन के इस्तीफे की अंतिम सिफारिश अभी तक आईएएस अधिकारियों का नियंत्रण करने वाले कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तक पहुंची ही नहीं है। तकनीकी रूप से उनकी फाइल अभी भी गृह मंत्रालय (MHA) के चक्कर काट रही है। जानकारों का कहना है कि किसी आईएएस के इस्तीफे में इतनी लंबी देरी का प्रशासनिक इतिहास में शायद ही कोई दूसरा उदाहरण मिले।सरकारी नियमों के पेंच में फंसा चुनाव लड़ने का सपना कन्नन गोपीनाथन ने अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करते हुए पिछले साल अक्टूबर में कांग्रेस का दामन थाम लिया था। उन्हें केरल विधानसभा चुनाव में पलक्कड़ सीट से कांग्रेस का मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था। लेकिन यहीं पर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 2014 का नियम 3(1) उनके आड़े आ गया। इस नियम के तहत कोई भी सेवारत सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ सकता और न ही चुनाव लड़ सकता है। चूंकि गोपीनाथन का इस्तीफा कागजों में अब तक मंजूर नहीं हुआ है, इसलिए तकनीकी रूप से वह आज भी भारत सरकार के कर्मचारी हैं। इसी पेंच के चलते वह चुनाव लड़ने के अयोग्य हो गए हैं।पीएम मोदी पर फूटा गोपीनाथन का गुस्सा, कहा- ‘ये सुस्त सरकार है’ इस्तीफा मंजूर न होने और चुनाव लड़ने से वंचित रह जाने से हताश कन्नन गोपीनाथन का गुस्सा अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फूटा है, जिनके पास DoPT मंत्रालय का प्रभार भी है। गोपीनाथन ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को सीधे टैग करते हुए इस पूरी प्रक्रिया को ‘शुद्ध उत्पीड़न’ करार दिया है। उन्होंने तल्ख लहजे में लिखा कि पिछले साढ़े छह साल से उनकी फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। न तो उन्हें वेतन दिया जा रहा है और न ही सेवामुक्त किया जा रहा है।गोपीनाथन ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा, “इस्तीफा देने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने के मेरे अधिकार को रोकना बेहद शर्मनाक और ओछी हरकत है। इस ओछी हरकत को रोकिए, और अपनी सुस्त सरकार को निर्देश दीजिए कि वह मेरे इस्तीफे पर तत्काल कार्रवाई करे।” अब देखना यह है कि गोपीनाथन के इस कड़े हमले के बाद क्या केंद्र सरकार उनके इस्तीफे की फाइल को आगे बढ़ाती है या फिर उनका राजनीतिक वनवास यूं ही जारी रहता है।
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