
News India Live, Digital Desk: करवा चौथ का व्रत सिर्फ एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है. कई महिलाएं सालों-साल इस व्रत को पूरे भक्तिभाव से करती हैं. जब यह व्रत 12 या 16 साल तक लगातार कर लिया जाता है, तो फिर इसका ‘उद्यापन’ करने की परंपरा है. यह एक तरह से ईश्वर को धन्यवाद कहने और व्रत को सफलतापूर्वक पूरा करने की घोषणा होती है.उद्यापन क्यों है ज़रूरी?शास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत को एक निश्चित समय तक करने के बाद उसका विधिवत उद्यापन करना बेहद शुभ माना जाता है. इससे व्रत का पूरा फल मिलता है और जीवन में कोई दोष नहीं लगता. उद्यापन करने से वैवाहिक जीवन में खुशियां, समृद्धि और पति-पत्नी के बीच प्यार और भी गहरा होता है. यह देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने का भी एक तरीका है.कब करें उद्यापन?करवा चौथ व्रत का उद्यापन आमतौर पर 12 या 16 साल तक व्रत रखने के बाद किया जाता है. हालाँकि, अगर कोई महिला स्वास्थ्य कारणों से या किसी विशेष परिस्थिति (जैसे पति का निधन, जो कि बहुत ही कम होता है) के कारण व्रत जारी नहीं रख पाती है, तो वह पहले भी उद्यापन कर सकती है. उद्यापन हमेशा करवा चौथ के दिन ही किया जाता है.करवा चौथ उद्यापन की सरल विधि:उद्यापन का दिन बिल्कुल सामान्य करवा चौथ व्रत की तरह ही शुरू होता है. सुबह सरगी खाने के बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. शाम को पूजा से पहले ये काम करें:सुहागिनों को निमंत्रण: उद्यापन वाले दिन 13 सुहागिन महिलाओं को भोजन के लिए निमंत्रण दें.पूजा की तैयारी: भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता की विधिवत पूजा करें.करवा पूजन: 13 करवा (मिट्टी के कलश) तैयार करें. हर करवे में गेहूं या चावल, 7 पूड़ी, 7 मीठी मट्ठी, हल्दी, मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, रोली, सिंदूर और एक सिक्का या दक्षिणा रखें. हर करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं.थाली तैयार करना: एक बड़ी थाली में पूजा की सभी सामग्री (दीपक, धूप, फूल, चंदन, रोली, चावल) के साथ-साथ एक साड़ी या सूट, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां और कुछ पैसे (दक्षिणा) रखें.कथा और पूजा: शाम को पूजा के समय करवा चौथ की कथा सुनें.करवा अर्पण और भोजन: चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद, इन्हीं 13 करवों और थालियों को निमंत्रित सुहागिनों को भेंट करें. उन्हें भोजन कराएं और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें.सास को भेंट: अपनी सास को भी एक साड़ी, मिठाई और दक्षिणा दें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें.व्रत खोलना: सभी रस्में पूरी करने के बाद पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत खोलें.उद्यापन के लिए ज़रूरी सामग्री (Samagri List):पूजा के लिए भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी की मूर्ति या तस्वीरकरवा माता की तस्वीरकलश (जल के लिए)दीपक और तेल/घी, माचिसधूप, अगरबत्तीफूल, मालाचंदन, रोली, कुमकुम, सिंदूरचावल (अक्षत)तांबे या मिट्टी का करवा (जल भरने के लिए)फल, मिठाई, मेवाकथा की पुस्तकछलनी (चंद्र दर्शन के लिए)गेहूं या चावल (करवे में भरने के लिए)13 छोटे करवा (मिट्टी के)7 पूड़ी और 7 मीठी मट्ठी (हर करवे के लिए)मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, सिंदूर (13 सुहागिनों के लिए)साड़ी या सूट (निमंत्रित सुहागिनों और सास के लिए)दक्षिणा (पैसे)पान, सुपारी, लौंग, इलायचीगंगाजलउद्यापन करना एक पवित्र और शुभ कार्य है, जो आपके वैवाहिक जीवन में खुशियां और सौभाग्य लाता है.
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