News India Live, Digital Desk: केरल में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस के भीतर ‘मुख्यमंत्री के चेहरे’ को लेकर मची खींचतान पर शशि थरूर ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। थरूर ने स्पष्ट किया कि चूंकि वह इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री बनने का सवाल ही नहीं उठता।थरूर के बयान की 3 बड़ी बातें”मैं रेस में नहीं हूं”: थरूर ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं हूं। मुख्यमंत्री उसे होना चाहिए जो निर्वाचित विधायक (MLA) हो, और मैं विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहा हूं।”स्टार कैंपेनर की भूमिका: उन्होंने बताया कि वे किसी एक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय पूरे राज्य में यूडीएफ (UDF) के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। उन्होंने कहा, “मेरा काम पार्टी के लिए ‘प्रचार’ करना है, ‘पद’ मांगना नहीं।”संसदीय रिकॉर्ड का त्याग: चुनाव प्रचार के लिए थरूर संसद के मौजूदा सत्र के आखिरी दो हफ्तों से अनुपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके 100% अटेंडेंस के रिकॉर्ड को इस बार चुनावी चुनौती के कारण टूटना पड़ेगा।केरल विधानसभा चुनाव 2026: एक नज़र में (Election Schedule)निर्वाचन आयोग के अनुसार, केरल में चुनावी बिगुल बज चुका है:मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026 (एक चरण में)।नतीजे (Counting): 4 मई 2026।मुख्य मुकाबला: सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF – पिनाराई विजयन) बनाम यूडीएफ (UDF – कांग्रेस गठबंधन)।विवाद और सर्वे (Background Context)थरूर का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:पब्लिक सर्वे: पिछले साल (जुलाई 2025) ‘केरल वाइब वोट सर्वे 2026’ में थरूर को यूडीएफ की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए 28.3% के साथ सबसे लोकप्रिय चेहरा बताया गया था, जिसे उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर साझा किया था।पार्टी के भीतर खींचतान: केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (जैसे के. सुधाकरण) भी मुख्यमंत्री पद की इच्छा जता चुके हैं, जिससे पार्टी में अंदरूनी कलह की खबरें आ रही थीं। थरूर के पीछे हटने से अब पार्टी के भीतर ‘चेहरे’ की लड़ाई थोड़ी शांत हो सकती है।
UK News