
News India Live, Digital Desk : मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से ‘केरलम’ (Keralam) ही कहा जाता है। ‘केरल’ शब्द दरअसल इस नाम का अंग्रेजी और हिंदी वर्जन है। राज्य सरकार का तर्क है कि जब संविधान की पहली अनुसूची में राज्यों के नाम दर्ज हैं, तो वहां स्थानीय भाषा और संस्कृति के सम्मान में ‘केरलम’ शब्द का उपयोग होना चाहिए।2. ऐतिहासिक आधार: अशोक के शिलालेखों से नाताकेरल का इतिहास बहुत प्राचीन है। सम्राट अशोक के काल (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) के शिलालेखों में इस क्षेत्र को ‘केरलपुत्र’ कहा गया है। बाद में संगम साहित्य और मध्यकालीन ग्रंथों में भी ‘केरलम’ शब्द का ही प्रयोग मिलता रहा है।3. ‘ऐक्य केरल’ आंदोलन: आधुनिक मांग की शुरुआतनाम बदलने का विचार नया नहीं है। 1920 के दशक में ‘ऐक्य केरल’ (United Kerala) आंदोलन शुरू हुआ था। उस समय मांग की गई थी कि भाषाई आधार पर मलयालम बोलने वाले सभी क्षेत्रों (मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर) को मिलाकर एक राज्य बनाया जाए और उसका नाम ‘केरलम’ रखा जाए। 1 नवंबर 1956 को जब राज्य बना, तब आधिकारिक कागजों में इसे ‘केरल’ लिख दिया गया, जिसे अब सुधारा जा रहा है।4. नाम बदलने की कानूनी प्रक्रिया क्या है?किसी भी राज्य का नाम बदलना इतना आसान नहीं है। इसके लिए एक लंबी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होता है:विधानसभा प्रस्ताव: राज्य विधानसभा को पूर्ण बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है (जो केरल ने कर लिया है)।केंद्र की मंजूरी: यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा जाता है।संवैधानिक संशोधन: संसद को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संशोधन करना पड़ता है।राष्ट्रपति की मुहर: राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही आधिकारिक तौर पर नाम बदलता है।5. क्या इससे पहले भी राज्यों के नाम बदले हैं?हाँ, भारत में कई राज्यों और शहरों के नाम उनकी स्थानीय पहचान के आधार पर बदले जा चुके हैं:मद्रास से तमिलनाडु (1969)मैसूर से कर्नाटक (1973)उत्तरांचल से उत्तराखंड (2007)उड़ीसा से ओडिशा (2011)
UK News