Wednesday , September 23 2026

National Herald Case: सोनिया और राहुल गांधी ने दिल्ली HC में ED की याचिका को दी चुनौती, बताया ‘कानूनी प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग’

नेशनल हेराल्ड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपना आधिकारिक जवाब दाखिल कर दिया है। दोनों नेताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) को सिरे से खारिज करने की मांग करते हुए इसे "कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग" (Abuse of the Process of Law) करार दिया है।

यह पूरा विवाद ट्रायल कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें विशेष अदालत ने ईडी की चार्जशीट (Prosecution Complaint) पर संज्ञान लेने से साफ इनकार कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए ईडी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब गांधी परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से जवाब दाखिल कर जांच एजेंसी की पूरी कार्रवाई की वैधानिकता पर ही गंभीर कानूनी सवाल खड़े कर दिए गए हैं।

Private Complaint vs FIR: क्या निजी शिकायत के आधार पर दर्ज हो सकता है PMLA केस?

सोनिया और राहुल गांधी द्वारा दाखिल जवाब में सबसे बड़ा कानूनी तर्क यह दिया गया है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के पूरे वैधानिक ढांचे में 'निजी शिकायत' (Private Complaint) के आधार पर मुकदमा चलाने का कोई प्रावधान ही नहीं है।

जवाब के अनुसार, PMLA की धारा 5(1) के तहत वित्तीय अपराध की जांच शुरू करने के लिए दो ही पूर्व-शर्तें हो सकती हैं—या तो पुलिस द्वारा धारा 173 CrPC के तहत दाखिल अंतिम रिपोर्ट (चार्जशीट/एफआईआर) हो, या फिर किसी जांच के लिए अधिकृत अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत। चूंकि नेशनल हेराल्ड का मामला भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा 2013-14 में दाखिल की गई एक निजी शिकायत पर आधारित है और इसमें किसी जांच एजेंसी द्वारा कोई मूल एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी, इसलिए ईडी द्वारा सीधे ECIR दर्ज करना और अभियोजन शुरू करना वैधानिक रूप से पूरी तरह अवैध और आधारहीन है।

7 Saal Ki Deri Aur ED Ki Jaldbaji: 7 साल की चुप्पी और अचानक 'लाइटनिंग स्पीड' पर सवाल

कांग्रेस नेताओं ने अपने हलफनामे में जांच एजेंसी के तौर-तरीकों और समय-सीमा पर भी सवाल उठाए हैं। जवाब में कहा गया है कि सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत 2014 की थी, लेकिन ईडी ने उस समय कोई मामला दर्ज नहीं किया और करीब सात साल तक इस पर "सोची-समझी चुप्पी" साधे रखी। इसके बाद 30 जून 2021 को जाकर अचानक ECIR दर्ज की गई।

जवाब में आगे कहा गया कि जब 16 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने कानूनी आधार न होने के कारण चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किया, तो ईडी ने अगले ही दिन 17 दिसंबर को असाधारण जल्दबाजी यानी "लाइटनिंग स्पीड" दिखाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। गांधी परिवार के अनुसार, देश भर में यह अकेला ऐसा मामला है जहां ईडी किसी निजी शिकायत को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चला रही है, जो एजेंसी के अपने पिछले सर्कुलर्स और तय कानूनी मानकों (Predicative Offence में FIR की अनिवार्यता) के बिल्कुल विपरीत है।

Supreme Court Judgments and Precedents: विजय मदनलाल चौधरी फैसले का दिया गया हवाला

जवाब में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ (2022/2023) का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इस फैसले के अनुसार, PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध नहीं है, बल्कि यह किसी 'अनुसूचित अपराध' (Scheduled Offence) पर निर्भर होता है। यदि मूल अनुसूचित अपराध के लिए कोई वैध एफआईआर या कानूनी जांच नहीं है, तो पीएमएलए की कार्रवाई खुद-ब-खुद शून्य हो जाती है।

गांधी परिवार ने तर्क दिया कि ईडी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश को एफआईआर से बड़ा दिखाने का मनगढ़ंत तर्क दे रही है, जो केवल "सुविधा की दलील" है। ट्रायल कोर्ट का 16 दिसंबर का फैसला कानूनी रूप से पूरी तरह त्रुटिहीन है और उसमें कोई भी क्षेत्राधिकार या प्रक्रियात्मक खामी नहीं है।

What Is National Herald Controversy: क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?

यह पूरा मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है।

  • एजेएल 'नेशनल हेराल्ड' अखबार का प्रकाशन करती थी।

  • आरोप है कि कांग्रेस पार्टी ने पहले एजेएल को ₹90 करोड़ का ब्याज-मुक्त ऋण दिया।

  • बाद में 2010 में 'यंग इंडियन' (Young Indian) नामक एक नई गैर-लाभकारी कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 76% हिस्सेदारी थी।

  • यंग इंडियन ने महज ₹50 लाख देकर कांग्रेस पार्टी से ₹90 करोड़ का कर्ज अपने नाम ट्रांसफर करा लिया और इसके बदले एजेएल के बहुसंख्यक शेयर हासिल कर लिए।

  • शिकायतकर्ता और ईडी का आरोप है कि इसके जरिए देश भर में फैली एजेएल की लगभग ₹2,000 करोड़ की अचल संपत्तियों पर गलत तरीके से नियंत्रण हासिल करने की आपराधिक साजिश रची गई। वहीं कांग्रेस का हमेशा से कहना रहा है कि यंग इंडियन एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट कंपनी (Section 25 Company) है, जिससे कोई भी शेयरधारक एक रुपये का भी व्यक्तिगत वित्तीय लाभ नहीं ले सकता।

High Court Listing: जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत में 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता की एकल पीठ के समक्ष गांधी परिवार के वकीलों ने मंगलवार को जानकारी दी कि उनका लिखित जवाब दाखिल हो चुका है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें दर्ज करते हुए मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दी है। आगामी सुनवाई में तय होगा कि क्या ईडी की पुनर्विचार याचिका सुनवाई योग्य है या ट्रायल कोर्ट का संज्ञान न लेने का फैसला बरकरार रहेगा।