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NEET UG 2026 : परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल हुआ तो क्या होगा? घबराएं नहीं, जानें NTA के सख्त नियम और समाधान

News India Live, Digital Desk: नीट यूजी (NEET UG) की परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों उम्मीदवारों के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा के दौरान ‘बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन’ एक अनिवार्य प्रक्रिया है, लेकिन कई बार तकनीकी कारणों या पसीने/मेहंदी की वजह से उम्मीदवारों का फिंगरप्रिंट मैच नहीं होता। ऐसे में छात्रों के मन में डर रहता है कि क्या उन्हें परीक्षा से रोक दिया जाएगा? NTA की गाइडलाइंस के मुताबिक, बायोमेट्रिक फेल होने पर उम्मीदवार को घबराने की जरूरत नहीं है, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं।बायोमेट्रिक फेल होने पर NTA का ‘प्लान बी’NTA के नियमों के अनुसार, यदि किसी छात्र का अंगूठे का निशान (Fingerprint) मशीन द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है, तो केंद्र पर मौजूद अधिकारी तुरंत अन्य विकल्पों का उपयोग करते हैं। इसमें आयरिस स्कैन (Iris Scan) यानी आंखों की पुतलियों के जरिए पहचान सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, उम्मीदवार के चेहरे का मिलान उसके द्वारा आवेदन पत्र में अपलोड की गई फोटो से किया जाता है। यदि सभी डिजिटल माध्यम विफल रहते हैं, तो मैन्युअल वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही छात्र को सीट पर बैठने की अनुमति दी जाती है।इन गलतियों से बचें: वरना प्रवेश में होगी मुश्किलअक्सर देखा गया है कि उम्मीदवार परीक्षा से कुछ दिन पहले हाथों पर मेहंदी, स्याही या टैटू बनवा लेते हैं, जो बायोमेट्रिक मशीन की रीडिंग में बाधा डालते हैं। NTA ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परीक्षा के दिन उम्मीदवारों के हाथ पूरी तरह साफ होने चाहिए। यदि किसी छात्र के उंगलियों के पोरों पर कोई कोटिंग (Chemical/Ink) पाई जाती है, तो उसे संदिग्ध माना जा सकता है। इसके अलावा, फेशियल रिकग्निशन के लिए चश्मा या कैप हटाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं ताकि सॉफ्टवेयर सटीक मिलान कर सके।वेरिफिकेशन प्रक्रिया क्यों है इतनी जरूरी?नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में ‘मुन्नाभाइयों’ और डमी कैंडिडेट के प्रवेश को रोकने के लिए बायोमेट्रिक डेटा सबसे बड़ा हथियार है। यह प्रक्रिया केवल प्रवेश के समय ही नहीं, बल्कि परीक्षा हॉल के भीतर भी दोहराई जा सकती है। NTA का कहना है कि बायोमेट्रिक डेटा का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है ताकि काउंसलिंग और कॉलेज अलॉटमेंट के समय भी छात्र की पहचान का मिलान किया जा सके। यदि कोई छात्र जानबूझकर वेरिफिकेशन प्रक्रिया में बाधा डालता है या सहयोग नहीं करता, तो उसका कैंडिडेटचर रद्द किया जा सकता है।