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News India Live, Digital Desk: Online Security : अक्सर ऐसा होता है, हम किसी चीज़ के बारे में बात कर रहे होते हैं और अगले ही पल उससे जुड़ा विज्ञापन हमारे Instagram फीड पर दिख जाता है. यह देखकर बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठता है: “क्या Instagram हमारी बातें सुन रहा है?” ये एक आम धारणा है, जिससे यूज़र्स अपनी प्राइवेसी को लेकर परेशान रहते हैं. इसी सवाल पर, Meta (Instagram की मूल कंपनी) के Instagram प्रमुख, एडम मोसेरी (Adam Mosseri) ने खुलकर अपनी बात रखी है और इस बड़ी गलतफहमी को दूर करने की कोशिश की है.एडम मोसेरी ने साफ तौर पर कहा है कि Instagram (या Meta की कोई भी ऐप) अपने यूज़र्स की बातचीत को सीधे माइक्रोफोन के ज़रिए रिकॉर्ड करके विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल नहीं करती. यह सुनकर आपको थोड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि यह तकनीकी रूप से संभव होने के बावजूद, कंपनी का कहना है कि वे ऐसा नहीं करते. मोसेरी ने इस बात पर जोर दिया कि अगर वे ऐसा कर रहे होते, तो कानूनी और नैतिक दोनों रूप से यह एक बड़ी समस्या होती.तो फिर हमें क्यों लगता है कि वे सुन रहे हैं?मोसेरी के अनुसार, इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं, जो आपकी इस सोच को बढ़ावा देते हैं:उच्च तकनीक वाली टारगेटिंग (Advanced Targeting): Meta के पास बेहद एडवांस एल्गोरिदम हैं, जो यूज़र्स के ऑनलाइन व्यवहार को बारीकी से ट्रैक करते हैं. इसमें आपके सर्च हिस्ट्री, जिन पोस्ट को आप लाइक या शेयर करते हैं, जिन दोस्तों के साथ इंटरैक्ट करते हैं, या जिन अन्य वेबसाइटों और ऐप्स का आप इस्तेमाल करते हैं, वह सब शामिल होता है. जब आप किसी चीज़ के बारे में बात करते हैं, तो अक्सर उससे जुड़ी कोई ऑनलाइन गतिविधि हाल ही में की गई होती है, जिसे ये एल्गोरिदम पकड़ लेते हैं.संयोग (Coincidence): कई बार ये सिर्फ संयोग भी हो सकता है. दुनिया बहुत बड़ी है और हर मिनट अनगिनत विज्ञापन चलाए जा रहे हैं. कुछ चीज़ें आपकी बातचीत से मेल खा जाएं, ये कोई बड़ी बात नहीं है. हमारा दिमाग उन चीजों पर ज़्यादा ध्यान देता है जो हमारी उम्मीदों से मेल खाती हैं.डेमोग्राफिक इनफॉरमेशन (Demographic Information): ऐप्स को पता होता है कि आप किस उम्र, लिंग या भौगोलिक क्षेत्र से हैं. आपकी दिलचस्पी की चीज़ें भी उन्हें पता होती हैं. इन्हीं जानकारियों के आधार पर भी आपको ऐसे विज्ञापन दिख सकते हैं जो आपकी बातचीत से मिलते-जुलते लगें.एडम मोसेरी का स्पष्ट बयान यूज़र्स के मन में उठ रहे सवालों को शांत करने की कोशिश करता है, लेकिन प्राइवेसी को लेकर बहस हमेशा चलती रहेगी. कंपनियों के लिए यह ज़रूरी है कि वे पारदर्शिता बनाए रखें और यूज़र्स को विश्वास दिलाएं कि उनकी निजता का सम्मान किया जाता है.
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