
News India Live, Digital Desk : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा ‘मिया मुस्लिम’ समुदाय को लेकर दिए गए एक बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हैदराबाद के सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री पर नफरत फैलाने और घटिया राजनीति करने का आरोप लगाया है।1. विवाद की जड़: CM हिमंत का बयानमुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि “मिया मुस्लिम” (बांग्लादेशी मूल के प्रवासी मुस्लिम) असम की संस्कृति और पहचान के लिए खतरा बन रहे हैं। उन्होंने कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में उनके बढ़ते प्रभाव और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic change) पर चिंता जताई थी।2. ओवैसी का ‘2 रुपये’ वाला हमलाअसदउद्दीन ओवैसी ने सीएम के इस बयान को “2 रुपये वाली राजनीति” (Cheap politics) करार दिया। उनके पलटवार की मुख्य बातें:संवैधानिक मर्यादा: ओवैसी ने कहा कि एक मुख्यमंत्री के पद पर बैठकर किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना संविधान की शपथ का उल्लंघन है।विफलता छुपाने का आरोप: ओवैसी ने तर्क दिया कि जब भी बीजेपी सरकार अपनी विफलताओं (बेरोजगारी, बाढ़ प्रबंधन) को छुपाना चाहती है, तो वह ‘मिया’ या ‘मुस्लिम’ कार्ड खेलती है।नागरिकता पर सवाल: उन्होंने पूछा कि यदि वे देश के नागरिक हैं, तो उन्हें इस तरह से अपमानित क्यों किया जा रहा है?3. ‘मिया’ शब्द पर राजनीतिअसम में ‘मिया’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर उन बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है जो पीढ़ियों पहले बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी बंगाल) से आकर बसे थे। मुख्यमंत्री सरमा अक्सर ‘स्वदेशी असमिया मुसलमानों’ और ‘मिया मुसलमानों’ के बीच अंतर स्पष्ट करने की बात करते हैं, जिसे विपक्ष समाज को बांटने की कोशिश बताता है।4. आगामी चुनावों की आहटराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे स्थानीय चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रम करीब आ रहे हैं, ध्रुवीकरण की यह बयानबाजी और तेज होगी। ओवैसी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
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