
News India Live, Digital Desk: Papankusha Ekadashi 2025 : आस्था और पुण्य की ओर बढ़ने वाले सभी भक्तों के लिए साल 2025 की पापानकुशा एकादशी एक बहुत ही खास मौका लेकर आ रही है। यह वह दिन है जब माना जाता है कि सच्चे मन से किए गए व्रत और पूजन से सारे पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नाम से ही स्पष्ट है – ‘पाप’ यानि गलतियाँ और ‘अंकुश’ यानि लगाम या खींचने वाला। इसका अर्थ है, ऐसा व्रत जो हमारे पापों को खींच कर दूर कर देता है।कब है पापानकुशा एकादशी 2025?हर साल अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह पावन पर्व मनाया जाता है। साल 2025 में यह पापानकुशा एकादशी [दिनांक यहाँ जोड़ें, यदि लिंक में हो तो] को पड़ेगी। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और जो भक्त इसे पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करते हैं, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होती है।व्रत कथा: एक पापी का उद्धार!इस एकादशी की एक बहुत ही प्रेरणादायक कथा है। प्राचीन समय में विंध्यपर्वत पर एक बहुत ही क्रूर बहेलिया रहता था जिसका नाम निश्रुल था। वह जीवन भर गलत काम करता रहा, जैसे शिकार करना, चोरी करना, लोगों को परेशान करना। जब वह बूढ़ा होकर मरने की कगार पर पहुँचा, तो यमराज के दूत उसे लेने आ पहुँचे। निश्रुल बहुत डर गया।उसी समय एक धर्मात्मा ऋषि वहां से गुज़र रहे थे। निश्रुल ने ऋषि से अपनी पीड़ा बताई। दयालु ऋषि ने निश्रुल को पापानकुशा एकादशी का महत्व बताया और उसे पूरी विधि-विधान से यह व्रत करने की सलाह दी। निश्रुल ने ऋषि के वचनों पर भरोसा करके उसी एकादशी पर अन्न-जल त्याग कर, सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना की। पूरी रात जागकर कीर्तन किया और अगले दिन दान-पुण्य भी किया।व्रत के प्रभाव से निश्रुल के सारे पाप धुल गए। यमदूतों को वापस लौटना पड़ा और भगवान विष्णु के पार्षद निश्रुल को स्वर्गलोक ले गए। यह कथा दर्शाती है कि भगवान सच्चे मन से की गई प्रार्थना और व्रत का फल ज़रूर देते हैं, चाहे व्यक्ति ने पहले कितने ही पाप क्यों न किए हों।क्या करें पापानकुशा एकादशी पर?इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।घर के मंदिर में विष्णु भगवान और माँ लक्ष्मी की पूजा करें। उन्हें पीतांबर, फल, फूल, भोग (तुलसी दल ज़रूर शामिल करें) अर्पित करें।दिन भर निराहार (बिना अन्न ग्रहण किए) रहें। अगर संभव न हो तो फलाहार ले सकते हैं।मन ही मन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें।रात भर जागकर भगवान विष्णु के भजन करें, कथा सुनें।अगले दिन (द्वादशी तिथि) पारण करें और किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराएं या दान-पुण्य करें।इस व्रत को करने से न केवल पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति भी होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
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