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Parliament: मोदी सरकार को संसद में लगा बड़ा झटका परिसीमन बिल गिरा, क्या अब अधर में लटकेगा महिला आरक्षण?

News India Live, Digital Desk: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए संसद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारी हंगामे और तीखी बहस के बीच, सरकार का महत्वपूर्ण ‘परिसीमन विधेयक’ (Delimitation Bill) लोकसभा में गिर गया है। इसे मोदी सरकार की हालिया वर्षों में संसद के भीतर पहली बड़ी विधायी हार के रूप में देखा जा रहा है। इस बिल के गिरने से न केवल सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है, बल्कि इसने आगामी महिला आरक्षण लागू होने की समयसीमा पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।संसद में कैसे पलटा पासा? विपक्ष की एकजुटता ने बिगाड़ा खेलसदन में जब इस बिल पर वोटिंग शुरू हुई, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस बिल का कड़ा विरोध किया, उनका तर्क था कि बिना उचित चर्चा और राज्यों की सहमति के सीटों का परिसीमन करना संघीय ढांचे के खिलाफ है। संख्या बल के गणित में मामूली अंतर के कारण यह बिल पास होने के लिए जरूरी आंकड़ा नहीं छू सका। बिल के गिरते ही विपक्षी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं सत्ता पक्ष के लिए यह स्थिति काफी असहज करने वाली रही।क्या महिला आरक्षण पर पड़ेगा इसका असर?इस बिल का गिरना महिला आरक्षण (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। नियम के मुताबिक, महिला आरक्षण को लागू करने से पहले देश में जनगणना और उसके बाद परिसीमन होना अनिवार्य है। अब जबकि परिसीमन बिल ही लटक गया है, तो यह आशंका जताई जा रही है कि क्या महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने में और देरी होगी? हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं और इस मुद्दे पर वैकल्पिक कानूनी रास्तों पर विचार कर रहे हैं।मोदी सरकार की पहली ‘संसदीय हार’ के मायनेराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हार ने यह संकेत दे दिया है कि संसद के भीतर अब सरकार के लिए हर बिल को पास कराना आसान नहीं होगा। यह घटनाक्रम आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भी एक बड़ा संदेश है। विपक्ष इस जीत को ‘लोकतंत्र की जीत’ बता रहा है, जबकि भाजपा नेतृत्व अब इस बात की समीक्षा कर रहा है कि आखिर रणनीति में चूक कहाँ हुई और सहयोगियों का पूरा समर्थन क्यों नहीं मिल सका।अब आगे क्या? सरकार के पास क्या हैं विकल्प?परिसीमन बिल गिरने के बाद अब सरकार के सामने दो मुख्य रास्ते बचे हैं। पहला यह कि वह इस बिल को कुछ संशोधनों के साथ दोबारा पेश करे या फिर इस पर आम सहमति बनाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाए। दूसरा विकल्प यह है कि सरकार इसे कुछ समय के लिए टाल दे और अन्य संवैधानिक प्रावधानों के जरिए सीटों के मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करे। फिलहाल, इस विधायी संकट ने राजधानी की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुँचा दिया है।