
News India Live, Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ती हेट स्पीच (भड़काऊ भाषण) की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नई गाइडलाइंस जारी करने की मांग वाली याचिका को सुनने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत पहले ही इस संबंध में पर्याप्त निर्देश दे चुकी है और अब नए दिशा-निर्देशों की आवश्यकता नहीं है।सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: ‘कानून अपना काम करेगा’अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि हेट स्पीच को रोकने के लिए ‘तहसीन पूनावाला’ और ‘शक्ति वाहिनी’ जैसे मामलों में पहले से ही विस्तृत गाइडलाइंस मौजूद हैं। कोर्ट ने तर्क दिया कि समस्या कानून की कमी नहीं, बल्कि मौजूदा कानूनों के सही कार्यान्वयन (Implementation) की है।बेंच ने टिप्पणी की, “हम हर मामले में नए नियम नहीं बना सकते। प्रशासन और पुलिस को मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। यदि कहीं उल्लंघन होता है, तो संबंधित अथॉरिटी के पास जाने का विकल्प खुला है।”क्या थी याचिकाकर्ता की मांग?याचिका में मांग की गई थी कि चुनाव और सार्वजनिक रैलियों के दौरान होने वाली हेट स्पीच को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट विशेष रूप से नई और सख्त गाइडलाइंस तैयार करे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मौजूदा व्यवस्था हेट स्पीच के बढ़ते ग्राफ को रोकने में नाकाम साबित हो रही है, जिससे समाज का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ रहा है।प्रशासन की जिम्मेदारी पर जोरसुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि हेट स्पीच के मामलों में पुलिस और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है। कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया हुआ है कि हेट स्पीच के मामलों में बिना किसी शिकायत (Suo Motu) के भी FIR दर्ज की जानी चाहिए। नई याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर बार-बार हस्तक्षेप करके न्यायिक प्रक्रिया को उलझाना नहीं चाहता।
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