News India Live, Digital Desk : राजनीति में अक्सर नेता और पत्रकार एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े नज़र आते हैं. तीखे सवाल और कड़ी आलोचनाएं इस पेशे का हिस्सा हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में से एक गिने जाते हैं. लेकिन हाल ही में उन्होंने एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जो राजनीति से परे इंसानियत की एक खूबसूरत मिसाल पेश करता है.
कैंसर से जंग लड़ रहे थे राजदीप
राजदीप सरदेसाई ने कुछ समय पहले खुलासा किया था कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था, जिसके लिए उन्हें एक सर्जरी से गुजरना पड़ा. यह उनके और उनके परिवार के लिए एक मुश्किल दौर था. लेकिन इस मुश्किल घड़ी में उनके पास एक ऐसा फोन आया, जिसकी उन्होंने शायद ही कल्पना की होगी.
जब प्रधानमंत्री ने खुद किया फोन
राजदीप ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया, “मुझे छह महीने पहले कैंसर हुआ था. सर्जरी के बाद, दिवाली के समय मेरे पास एक फोन आया… ‘नमस्कार, प्रधानमंत्री जी आपसे बात करेंगे’.” यह फोन किसी और का नहीं, बल्कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था.
यह बातचीत कोई एक-दो मिनट की औपचारिक कुशल-क्षेम नहीं थी, बल्कि करीब आधे घंटे तक चली. राजदीप बताते हैं कि पीएम मोदी ने उनसे सिर्फ सेहत का हाल ही नहीं जाना, बल्कि जिंदगी जीने को लेकर कई सलाह भी दीं.
PM मोदी ने दिए सेहत के टिप्स
सरदेसाई के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने उन्हें समझाया कि किस तरह की जिंदगी जीनी चाहिए. उन्होंने कहा, “मोदी जी ने मुझे आधे घंटे तक बताया कि क्या करना चाहिए. सुबह छह बजे उठो, ठंडे पानी से नहाओ… इस तरह की कई बातें.” यह एक राजनेता का फोन नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का फोन था जो अपनी निजी चिंताओं को साझा कर रहा था.
परिवार भी हुआ PM का कायल
इस फोन कॉल का राजदीप के परिवार पर गहरा असर पड़ा. उन्होंने बताया, “जब पीएम का फोन आया, तो सिंगापुर में रहने वाली मेरी बहन भी यहां आई हुई थीं. मेरी बहन और मेरे बच्चे पीएम मोदी के इस कदम की तारीफ करते हुए बोले कि इसे कहते हैं नेता.”
राजदीप ने यह भी साफ किया कि उन्हें नहीं लगता कि यह वोट पाने के लिए किया गया था, क्योंकि वह पीएम मोदी को 90 के दशक से जानते हैं, जब वह प्रधानमंत्री नहीं थे. उनका मानना है कि यह एक नेता की खूबी है कि वह अपने आलोचकों की भी परवाह करते हैं और सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करते हैं.
यह किस्सा दिखाता है कि राजनीतिक मतभेद चाहे जितने भी गहरे हों, इंसानियत का रिश्ता उससे कहीं ऊपर होता है.
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