
नई दिल्ली/लखनऊ। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर देश में चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े देशव्यापी राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन में तब्दील होता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) की भी एंट्री हो गई है। शनिवार को एक विशेष वीडियो संदेश जारी करते हुए अन्ना हजारे ने केंद्र की मोदी सरकार को सख्त लहजे में आगाह किया है कि सरकार को आंदोलनकारियों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए और तुरंत शिक्षाविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) से संवाद स्थापित करना चाहिए। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक नीट धांधली को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। साल 2011 में लोकपाल आंदोलन से तत्कालीन यूपीए सरकार की चूलें हिलाने वाले अन्ना हजारे के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
"संवाद और सौहार्द ही रास्ता, ज्यादा खींचने से नहीं निकलेगा समाधान"
अन्ना हजारे ने अपने संदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों और बातचीत की महत्ता पर जोर देते हुए कहा, "किसी भी लोकतांत्रिक देश में बातचीत और आपसी सहमति से ही बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान निकलता है। मैंने भी अपने सार्वजनिक जीवन में समाज कल्याण के लिए कई बार आमरण अनशन किए हैं, लेकिन सरकार और आंदोलनकारियों के बीच ऐसी गतिरोध वाली स्थिति कभी नहीं आई। सरकार उनकी मांगों को लेकर स्पष्ट रूप से 'हां' कहे या 'ना', लेकिन टेबल पर बैठकर बातचीत करने में भला क्या हर्ज है? अगर इस संवेदनशील मामले को बिना वजह ज्यादा खींचा जाएगा, तो समस्या सुलझने के बजाय और विकराल रूप ले लेगी।"
21वें दिन बिगड़ी तबीयत, जंतर-मंतर से अस्पताल शिफ्ट किए गए वांगचुक
इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी इस आंदोलन में शनिवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा बल के साथ कार्रवाई करते हुए सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटा दिया। वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का शनिवार को 21वां दिन था और उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही थी, जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। सरकार की इस अचानक हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर समूचे विपक्ष ने इसे पूरी तरह 'तानाशाही' (Dictatorship) करार दिया है और आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार देश में लोकतंत्र तथा संविधान की मर्यादा को खुलेआम छिन्न-भिन्न करने पर उतारू है।
राहुल गांधी का सरकार पर सीधा वार: "लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल रही है पुलिस"
सोनम वांगचुक को धरना स्थल से जबरन हटाए जाने के खिलाफ मुख्य विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के तमाम दलों, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक सुर में सरकार को आड़े हाथों लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस कार्रवाई को पूरी तरह असंवैधानिक ठहराते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर लिखा, "असत्य और हिंसा ही वर्तमान मोदी सरकार के दो मुख्य कामकाजी सिद्धांत बन चुके हैं। सोनम वांगचुक, जो देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और नीट के न्याय के लिए पूरी तरह अहिंसक और शांतिपूर्ण भूख हड़ताल पर थे, उन्हें जंतर-मंतर से इस तरह हटाना बेहद शर्मनाक और गलत है। जंतर-मंतर से महिला पहलवानों को घसीटने से लेकर पूर्व सैनिकों के साथ बदसलूकी करने तक, इस सरकार ने बार-बार देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला है। लेकिन सरकार याद रखे कि देश के छात्रों का हक उठाने वाली आवाजों को कोई भी ताकत दबा नहीं सकती।"
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