_683553389.jpg)
चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच मद्रास हाईकोर्ट ने आईपीएल (IPL) मैचों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मंगलवार को अदालत ने उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें चेन्नई में होने वाले आईपीएल मैचों को चुनाव संपन्न होने तक स्थगित करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि मैचों के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों और प्रतीकों के जरिए आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) का उल्लंघन हो सकता है।अदालत की चुटीली टिप्पणी: “मजा आया ना? दूसरा मैच भी देखिए”मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए बेहद दिलचस्प टिप्पणी की। बेंच ने गौर किया कि याचिका दायर होने के बाद एक मैच पहले ही हो चुका है और उसमें आचार संहिता के उल्लंघन का कोई मामला सामने नहीं आया है।अदालत ने याचिकाकर्ता से मुस्कुराते हुए कहा:“एक मैच तो खत्म हो चुका है, कुछ हुआ ही नहीं। आपने मैच देखा, है ना? आपको मजा आया, है ना? जाइए और दूसरे मैच का भी आनंद लीजिए।”चुनाव आयोग का मामला, कोर्ट का हस्तक्षेप नहींयाचिकाकर्ता ने मांग की थी कि स्टेडियम के अंदर राजनीतिक विज्ञापनों और चुनावी सामग्री पर प्रतिबंध लगाया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान नियमों का पालन कराना चुनाव आयोग (Election Commission) का काम है, न कि अदालत का।कोर्ट ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा:हम यहां कुछ नहीं कर सकते, यह पूरी तरह चुनाव आयोग का मामला है।आपकी याचिका केवल ‘आशंका’ और ‘डर’ पर आधारित है।अगर कहीं नियमों का उल्लंघन होता है, तो याचिकाकर्ता सीधे चुनाव आयोग से संपर्क कर सकता है।चुनाव आयोग पहले से ही हर चीज का ध्यान रख रहा है।भगवद् गीता पर मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसलाइसी दौरान मद्रास हाईकोर्ट का एक और फैसला चर्चा में रहा। कोर्ट ने गृह मंत्रालय के एक पुराने आदेश को रद्द करते हुए कहा कि भगवद् गीता केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि ‘नैतिक विज्ञान’ (Moral Science) है। अदालत ने इसे भारतीय सभ्यता का एक अभिन्न हिस्सा बताया और कहा कि इसे पूर्ण रूप से केवल धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
UK News
