
देशभर में 12वीं की परीक्षाएं समाप्त होने और उच्च शिक्षा के नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही लाखों छात्र और अभिभावक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश की तैयारियों में जुट गए हैं। इसी बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने छात्रों के भविष्य और मेहनत की कमाई को ठगी से बचाने के लिए एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। यूजीसी ने देश के अलग-अलग राज्यों में अवैध और बिना किसी वैधानिक मंजूरी के संचालित हो रहे 32 फर्जी विश्वविद्यालयों (Fake Universities) की अद्यतन सूची आधिकारिक रूप से सार्वजनिक कर दी है। शिक्षा नियामक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इन संस्थानों को न तो किसी केंद्र या राज्य अधिनियम के तहत मान्यता मिली है और न ही इन्हें स्नातक (Undergraduate), स्नातकोत्तर (Postgraduate) या पीएचडी (Ph.D.) जैसी कोई भी डिग्री प्रदान करने का अधिकार है। इन संस्थानों से प्राप्त की गई कोई भी डिग्री सरकारी या निजी नौकरियों तथा आगे की उच्च शिक्षा के लिए पूरी तरह से अमान्य (Invalid) और निष्प्रभावी मानी जाएगी।
यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 22 और फर्जी संस्थानों की कानूनी हकीकत
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कड़े नियमों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अनुसार भारत में केवल वही संस्थान छात्रों को डिग्रियां प्रदान कर सकते हैं जिन्हें कानूनी दर्जा प्राप्त हो। यूजीसी एक्ट की धारा 2(f) के तहत केंद्र या राज्य विधानमंडल के अधिनियम द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय या धारा 3 के तहत स्थापित 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' (Deemed-to-be University) ही मान्यता प्राप्त श्रेणी में आते हैं। इसके अतिरिक्त संसद के किसी विशेष अधिनियम द्वारा गठित संस्थान ही डिग्री बांटने के लिए अधिकृत हैं।
यूजीसी अधिनियम की धारा 22 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि किसी भी अन्य संस्था, कॉलेज या अकादमी को अपने नाम के साथ 'विश्वविद्यालय' (University) शब्द जोड़ने या छात्रों को शैक्षणिक उपाधियां/डिग्रियां बांटने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। यदि कोई संस्थान यूजीसी की स्वीकृति के बिना अपने नाम के साथ 'यूनिवर्सिटी' शब्द का इस्तेमाल करता है या डिग्रियां बांटता है, तो वह पूरी तरह से अवैध और कानून का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे संस्थानों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र केवल कागज के पन्ने मात्र होते हैं, जिनकी कानून की नजर में कोई कीमत नहीं होती।
सावधान! दिल्ली और यूपी बने फर्जी यूनिवर्सिटीज के सबसे बड़े ठिकाने
यूजीसी द्वारा जारी राज्यवार आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने पर एक भयावह तस्वीर सामने आती है। देश की राजधानी दिल्ली और भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक फर्जी और अनधिकृत विश्वविद्यालय फल-फूल रहे हैं। यूजीसी की अद्यतन सूची के अनुसार, केवल दिल्ली में ही 12 फर्जी विश्वविद्यालय संचालित पाए गए हैं, जो देश के किसी भी एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में सबसे अधिक संख्या है।
इसके बाद उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का स्थान आता है, जहां कई फर्जी संस्थान बिना किसी डर के वर्षों से शैक्षणिक गतिविधियों का झांसा देकर छात्रों को ठगने का काम कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश और पुडुचेरी में भी ऐसे फर्जी विश्वविद्यालय पाए गए हैं। ये संस्थान भव्य वेबसाइटों, भ्रामक विज्ञापनों, घर बैठे या डिस्टेंस लर्निंग से त्वरित डिग्री देने के लुभावने वादों और एजेंटों के जाल के जरिए ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले सीधे-साधे छात्रों को अपना शिकार बनाते हैं।
यूजीसी द्वारा ब्लैकलिस्ट किए गए फर्जी विश्वविद्यालयों की राज्यवार सूची
छात्रों और अभिभावकों की जानकारी और सतर्कता के लिए यूजीसी द्वारा चिन्हित किए गए प्रमुख 32 फर्जी विश्वविद्यालयों का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:
1. दिल्ली (Delhi – 12 संस्थान):
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कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज, दिल्ली।
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यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, दिल्ली।
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वोकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली।
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एडीआर-सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी, राजेंद्र प्लेस, नई दिल्ली।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, नई दिल्ली।
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विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ-एंप्लॉयमेंट, संजय एन्क्लेव, दिल्ली।
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आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी), रोहिणी, दिल्ली।
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ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंसेज (AIIPPHS), अलीपुर, दिल्ली।
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वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी (WPUNU), पीतमपुरा, नई दिल्ली।
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इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग, कोटला मुबारकपुर, दिल्ली।
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माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, नेहरू प्लेस, नई दिल्ली।
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सॉल्यूशंस, जनकपुरी, नई दिल्ली।
2. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh):
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गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)।
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अचलताल, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)।
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भारतीय शिक्षा परिषद, भारत भवन, मटियारी चिनहट, फैजाबाद रोड, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)।
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महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा / नोएडा (उत्तर प्रदेश)।
3. पश्चिम बंगाल (West Bengal):
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, चौरंगी रोड, कोलकाता।
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इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, डायमंड हार्बर रोड, कोलकाता।
4. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh):
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क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर (आंध्र प्रदेश)।
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बाइबल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इंडिया, विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)।
5. कर्नाटक (Karnataka):
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सर्व भारतीय शिक्षा पीठ, तुमकुर (कर्नाटक)।
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ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी, राजाजी नगर, बेंगलुरु (कर्नाटक)।
6. केरल (Kerala):
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सेंट जॉन्स यूनिवर्सिटी, किशानाट्टम (केरल)।
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इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोफेटिक मेडिसिन (IIUPM), कोझिकोड (केरल)।
7. महाराष्ट्र (Maharashtra):
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राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर (महाराष्ट्र)।
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नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ, सोलापुर (महाराष्ट्र)।
8. पुडुचेरी (Puducherry):
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श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, थिलास्पेट (पुडुचेरी)।
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उषा लच्छुमनन कॉलेज ऑफ एजुकेशन, थिरुक्कनूर (पुडुचेरी)।
9. अन्य राज्य (राजस्थान, झारखंड, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश):
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राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, भिवाड़ी, अलवर (राजस्थान)।
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दक्षा यूनिवर्सिटी (वोकेशनल एंड लाइफ स्किल एजुकेशन), रांची (झारखंड)।
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मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद (हरियाणा)।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश)।
एडमिशन से पहले फर्जी यूनिवर्सिटीज की पहचान कैसे करें? यूजीसी के सेफ्टी टिप्स
यूजीसी ने छात्रों और उनके अभिभावकों से किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने और फीस जमा करने से पहले कुछ अनिवार्य सावधानियां बरतने की अपील की है।
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आधिकारिक वेबसाइट पर सत्यापन: किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (ugc.gov.in) पर जाएं। वहां "Universities" सेक्शन के अंतर्गत 'State Universities', 'Central Universities', 'Deemed Universities' और 'Private Universities' की स्वीकृत सूचियों की जांच करें।
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'Fake Universities' टैब की जांच: यूजीसी पोर्टल पर दिए गए "Fake Universities" टैब को जरूर देखें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जिस संस्थान में आप प्रवेश ले रहे हैं, वह किसी काली सूची में तो शामिल नहीं है।
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संबद्धता (Affiliation) और एआईसीटीई/नैक एप्रूवल: यदि आप किसी तकनीकी, मेडिकल या प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश ले रहे हैं, तो केवल यूजीसी ही नहीं, बल्कि AICTE (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन), NCTE, PCI या NAAC जैसे संबंधित राष्ट्रीय निकायों के अनुमोदन पत्र (Approval Letters) और मान्यता कोड की जांच करें।
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कागजी गजट और राज्य अधिनियम का प्रमाण: यदि कोई नया विश्वविद्यालय स्वयं को राज्य या निजी विश्वविद्यालय के रूप में प्रचारित करता है, तो उससे संबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) और एक्ट नंबर का विवरण मांगने में न झिझकें।
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डिस्टेंस लर्निंग कोर्सेज के लिए 'DEB' की मंजूरी आवश्यक: ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) के माध्यम से पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के लिए यूजीसी के 'डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो' (DEB) की अलग से मंजूरी होना अनिवार्य है। बिना डीईबी अप्रूवल के चलाई जा रही डिस्टेंस डिग्रियां पूरी तरह अवैध होती हैं।
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले संस्थानों पर होगी कानूनी कार्रवाई
यूजीसी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फर्जी यूनिवर्सिटीज की सूची जारी करने के साथ ही संबंधित राज्य सरकारों, पुलिस प्रशासन और शिक्षा मंत्रालयों को इन संस्थानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखे गए हैं। ऐसे अनधिकृत संस्थानों के परिसरों को सील करने, मुख्य संचालकों पर जालसाजी व धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करने और उनकी भ्रामक वेबसाइटों को ब्लॉक करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही यूजीसी ने जनता से भी सहयोग मांगा है। यदि किसी छात्र या नागरिक को अपने आसपास किसी ऐसे संदिग्ध संस्थान, कोचिंग सेंटर या अकादमी का पता चलता है जो फर्जी डिग्रियां बांटने का नेटवर्क चला रहा है, तो वे तुरंत यूजीसी के शिकायत निवारण पोर्टल (e-Samadhan Portal) या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उच्च शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यूजीसी समय-समय पर ऐसी सार्वजनिक सूचियों को अपडेट करता रहता है ताकि देश के युवाओं का बहुमूल्य समय, पैसा और करियर किसी आपराधिक सिंडिकेट की भेंट न चढ़े।
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