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नई दिल्ली/लखनऊ। मार्च की शुरुआत के साथ ही देश के मौसम ने अचानक एक खतरनाक करवट ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि बंगाल की खाड़ी से उठा भयंकर चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ (Cyclone Montha) और उत्तर भारत में सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) देश के मौसम को पूरी तरह से झकझोरने वाले हैं। अगले 24 से 72 घंटों के भीतर देश के लगभग 21 राज्यों में आंधी-तूफान, भारी बारिश और ओलावृष्टि का तांडव देखने को मिल सकता है।पहाड़ों पर बर्फबारी तो मैदानों में ‘मोंथा’ का कहरमौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, इस ‘डबल अटैक’ के कारण पूर्वी और मध्य भारत में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ठंडी, तेज हवाएं ठिठुरन बढ़ाएंगी। कई जगह ओले गिरने की भी चेतावनी है, जिससे तापमान में अचानक भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। तटीय इलाकों में समुद्र की लहरें उग्र रूप ले सकती हैं, जिसे देखते हुए मछुआरों के समुद्र में जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।किसानों की बढ़ी धड़कनें, गेहूं-सरसों की फसल पर संकटखेतों में पककर तैयार खड़ी रबी की फसलों के लिए यह बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि किसी बड़े संकट से कम नहीं है। इस समय गेहूं और सरसों की फसलें कटाई के अंतिम चरण में हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए अपील की है कि वे कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं और खेतों में जलभराव रोकने के पुख्ता इंतजाम करें। जरा सी लापरवाही किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है।घर से निकलने से पहले बरतें ये सावधानियांचक्रवात ‘मोंथा’ और पश्चिमी विक्षोभ का यह खतरनाक गठजोड़ अगले तीन दिनों तक पूरे उफान पर रहेगा। स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा करने से बचें। आंधी-तूफान के दौरान कमजोर इमारतों, होर्डिंग्स और बड़े पेड़ों के नीचे खड़े न हों। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslide) का खतरा काफी बढ़ गया है, इसलिए वहां के निवासियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अपने वाहनों को सुरक्षित और ढके हुए स्थानों पर ही पार्क करें।अमर उजाला आपसे अपील करता है कि मौसम के पल-पल बदलते मिजाज को देखते हुए केवल IMD के आधिकारिक बुलेटिन और स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैल रही मौसम से जुड़ी किसी भी अफवाह पर आंख मूंदकर विश्वास न करें और सुरक्षित रहें।
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