
News India Live, Digital Desk: हज़ारों साल पहले भगवान बुद्ध ने भारत की धरती से शांति का जो संदेश दिया था, उसकी गूँज आज पूरी दुनिया को सुनाई देने वाली है। ताज़ा खबर यह है कि दिल्ली अब एक ‘बुद्धिस्ट पावर एक्सिस’ यानी बौद्ध शक्ति के सबसे बड़े केंद्र के रूप में अपनी धाक जमाने जा रहा है। इसे लेकर दिल्ली में एक बहुत बड़ा वैश्विक शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है।अब आपके मन में सवाल आ सकता है कि यह सम्मेलन सिर्फ़ पूजा-पाठ तक सीमित है? तो इसका जवाब है बिल्कुल नहीं! इसे भारत के ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) की एक बहुत बड़ी कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसका सीधा सा मतलब ये है कि भारत दुनिया को यह बता रहा है कि वह केवल सैन्य ताकत या परमाणु हथियारों के बल पर ‘विश्व गुरु’ नहीं बनना चाहता, बल्कि वह अपनी संस्कृति, विरासत और शांति के मूल्यों से देशों को जोड़ना चाहता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन उन देशों के साथ हमारे रिश्तों को और मज़बूत करेगा जो बुद्ध की शिक्षाओं को अपना आदर्श मानते हैं। वियतनाम, जापान, कंबोडिया, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों के साथ भारत की दोस्ती अब नए लेवल पर पहुँचने वाली है।अक्सर कहा जाता है कि जब बारूद का शोर बढ़ता है, तो शांति की एक किरण दुनिया का रास्ता आसान कर देती है। दिल्ली का यह पावर सेंटर न सिर्फ़ एशियाई देशों के बीच भारत का कद बढ़ाएगा, बल्कि शांति की इस मुहिम में दुनिया की नज़र अब भारत के फैसलों पर टिकी होगी।यह आयोजन सिर्फ धर्म का सम्मान नहीं है, बल्कि यह बदलते हुए उस भारत की कहानी है जो आधुनिकता के साथ अपनी पुरानी जड़ों पर भी फक्र करना जानता है। आपको क्या लगता है? क्या वाकई ‘बुद्ध का रास्ता’ आज की दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरत है? कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें!
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