
News India Live, Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण तनाव और युद्ध की आहटों के बीच एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और गुप्त ’15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव’ (15-Point Peace Plan) पेश किया है। वॉशिंगटन से आई इस पहल ने दुनिया भर के बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम संकेत दे रहा है कि अमेरिका अब सीधे टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने की रणनीति पर काम कर रहा है।क्या है ट्रंप का 15 सूत्रीय ‘सीजफायर’ प्लान?सूत्रों के मुताबिक, इस शांति प्रस्ताव में कई ऐसे कड़े और महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं जो पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं। इस प्लान में मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने, क्षेत्रीय मिलिशिया समूहों को दी जाने वाली मदद रोकने और बदले में ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी ढील देने की बात कही गई है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान इन शर्तों पर सहमत होता है, तो अमेरिका उसके साथ एक ऐतिहासिक समझौता करने के लिए तैयार है, जो आने वाले दशकों के लिए शांति सुनिश्चित करेगा।ईरान का रुख और वैश्विक राजनीति पर असरईरान की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन तेहरान के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर गहन चर्चा शुरू हो गई है। रूस और चीन जैसे देश भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह ‘मैक्सिमम प्रेशर’ और ‘मैक्सिमम नेगोशिएशन’ वाला फॉर्मूला काम कर सकता है, क्योंकि युद्ध की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था भी काफी दबाव में है। यदि यह समझौता सफल होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया को आर्थिक राहत मिलेगी।मिडल ईस्ट में शांति की नई उम्मीदइस शांति पहल को ‘तीसरे विश्व युद्ध’ के खतरे को टालने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले में किसी तीसरे देश (जैसे ओमान या कतर) को मध्यस्थ बनाने के भी पक्ष में हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव न केवल इजरायल-ईरान तनाव को कम करेगा, बल्कि लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों को भी सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। दुनिया की निगाहें अब ईरान के सुप्रीम लीडर के अगले कदम पर टिकी हैं।
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